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Rohtak News: जूट बैग की बिक्री से लाखनमाजरा की आशा बनी मिसाल

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19 जूट बैग की स्टॉल पर मौजूद लाखनमाजरा की आशा। स्रोत : स्वयं
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रोहतक। कॉस्मेटिक दुकान चला रहीं लाखनमाजरा की आशा आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी है। पिछले तीन वर्षों से आशा जूट बैग का काम भी कर रही हैं। अनेक सरस मेलों में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से आशा जूट बैग की बिक्री के लिए स्टॉल लगाती हैं। वह 22 सरस मेलों में स्टॉल लगा चुकी हैं।
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वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से आई सीआरपी टीम ने अगस्त 2014 में आशा व आसपास की 11 महिलाओं को प्रेरित कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत श्रीराम स्वयं सहायता समूह का गठन करवाया।
समूह से जुड़ने के बाद मिशन की ओर से आयोजित विभिन्न क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर उन्हें नए कौशल सीखने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के बाद उन्हें एक वर्ष के लिए लाखनमाजरा गांव में गठित समूहों की देखरेख के लिए बतौर समूह सखी की जिम्मेदारी दी गई।
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बतौर समूह सखी काम करते हुए मिशन की ओर से आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने से उनके कौशल और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई जिससे उन्हें स्थाई आजीविका के अवसर प्राप्त हुए।
सरकार की योजना के तहत स्वयं सहायता समूह ने उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए 1 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध करवाया। इस राशि से उन्होंने कॉस्मेटिक की दुकान शुरू की और इसके साथ-साथ जूट बैग बनाने का काम भी शुरू किया।

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15-20 दिन में 1 लाख के जूट बैग की होती है बिक्री
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि आशा को अब तक 22 सरस मेलों में भाग लेने का अवसर मिला है। एक सरस मेले में 15-20 दिनों के दौरान औसतन 1 लाख रुपये के जूट बैग की बिक्री हो जाती है जिससे खर्च निकालने के बाद अच्छी आय प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि इस काम से उनके परिवार को स्थाई आजीविका मिली है और अब उनके परिवार की मासिक आय 10 से 15 हजार रुपये तक हो रही है।
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