शिक्षकों की कमी के चलते छात्राओं का प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। महम खंड के गांव निंदाना और कलानौर खंड के गांव लाहली में छात्राओं ने सुबह ही स्कूलों पर ताला जड़कर प्रदर्शन किया। साथ ही ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निंदाना में तो स्कूल का चपरासी अंग्रेजी पढ़ा रहा है। जवाब में स्कूल के प्राचार्य ने कहा कि चपरासी बीए, बीएड व एचटेट पास है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से जल्द शिक्षकों की कमी पूरी करने की मांग की।
महम-गोहाना मार्ग पर स्थित निंदाना मुख्यमंत्री का पैतृक गांव है। गांव के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल की छात्राओं ने मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया। स्टाफ को भी अंदर जाने से रोक दिया। इस संघर्ष में ग्रामीणों ने भी छात्राओं का साथ दिया। छात्राओं ने बताया कि स्कूल में विद्यार्थियों की अच्छी खासी संख्या होने के बावजूद अध्यापकों की कमी बनी हुई है।
गांव के पूर्व सरपंच राजेंद्र, संदीप नेहरा, नेहरू, अमित राठी, आनंद नेहरा, पवन राठी का कहना है कि स्कूल में चपरासी अंग्रेजी पढ़ाता है। स्कूल में 12वीं कक्षा तक 365 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। स्कूल में पहले से ही अंग्रेजी का अध्यापक नहीं है, जिसके चलते चपरासी पढ़ाता है। अब गणित, विज्ञान, ड्राइंग व शारीरिक शिक्षा के अध्यापकों के तबादले होने से पांच अध्यापकों की कमी हो गई। इतना ही नहीं छठी से आठवीं तक विज्ञान व गणित का कोई अध्यापक नहीं है। इसी तरह बड़ी कक्षाओं में भी अध्यापकों की कमी बनी हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि अधिकारियों से इस बारे में कई बार बात की गई, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला है। थक-हारकर आखिर में यह कदम उठाना पड़ा।
परीक्षा पूरी होने से पहले दूर हो जाएगी शिक्षकों की कमी : बीईओ
स्कूल पर ताला जड़ने की सूचना मिलने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी बिजेंद्र हुड्डा मौके पर पहुंचे तथा छात्राओं को मनाना शुरू किया, लेकिन छात्राएं टस से मस नहीं हुईं। छात्राओं ने कहा कि जब तक उनके स्कूल में अध्यापक नहीं आ जाते वे यहीं बैठी रहेंगी। इसके बाद जिला अधिकारी ने भी छात्राओं को आश्वासन दिया कि 29 सितंबर से अर्द्ध वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। परीक्षा समाप्त होने से पहले स्कूल में पूरा स्टाफ मुहैया करवा दिया जाएगा। ग्रामीणों के समझाने के बाद बड़ी मुश्किल से छात्राओं ने स्कूल का ताला खेला। पूरे मामले के संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी बिजेंद्र हुड्डा का कहना है कि सरकार ज्यों ही स्टाफ मुहैया करवाएगी सभी स्कूलों में भेजने का कार्य करेंगे। जब तक जहां स्टाफ की व्यवस्था कर सकेंगे, वहां करेंगे।
चपरासी एचटेट पास, पढ़ाने में बुराई क्या : प्राचार्य
चपरासी बीए, बीएड व एचटेट पास है। उसकी सिर्फ दस दिन से ही छठी कक्षा में ड्यूटी लगाई गई थी। अगर क्वालीफाई व्यक्ति अध्यापकों की कमी के चलते छोटे बच्चों को पढ़ा दे तो इसमें बुराई नहीं है। -सुरेंद्र कुमार, प्राचार्य राकवमावि निंदाना।
इसी तरह कलानौर खंड के गांव लाहली में अध्यापकों की संख्या कम व स्कूल मर्ज करने के विरोध में मंगलवार को राजकीय कन्या स्कूल लाहली के गेट पर ताला जड़ सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने 10 दिन में शिक्षकों की कमी पूरी करने का भरोसा दिया तो दो घंटे बाद ताला खोल दिया गया।
अभिभावकों का कहना है कि 22 सितंबर को भी ग्रामीणों व बच्चों ने प्रदर्शन किया था। उस समय अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। उस समय सरकार को तीन दिन का अल्टीमेट दिया था। मंगलवार को अल्टीमेटम पूरा होने के बाद भी शिक्षकों की कमी पूरी नहीं की गई। ऐसे में उनको दोबारा से विरोध प्रदर्शन के राह पर चलना पड़ा। अभिभावकों और बच्चों ने सुबह 8 बजे स्कूल के गेट पर ताला जड़कर प्रदर्शन किया। अध्यापकों को अंदर नहीं जाने दिया। 2 घंटे के बाद अतिरिक्त खंड शिक्षा अधिकारी सुशील भारती ने मौके पर पहुंचकर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी दिलजीत सिंह से संपर्क किया। बीईओ ने उच्च अधिकारियों के आश्वासन पर 10 दिन के भीतर साइंस व गणित का अध्यापक मुहैया करवाने का आश्वासन दिया, जिस पर अभिभावकों ने धरना प्रदर्शन खत्म किया।
सरकार की मंशा शिक्षा का निजीकरण : नफे सिंह
विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच पहुंचे इनेलो नेता नफे सिंह लाहली ने कहा कि स्कूल के गेट पर ताला लगाना बिल्कुल गलत बात है। इसमें सरकार का कोई नुकसान नहीं है, बल्कि छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होगी। सरकार की मंशा तो शिक्षा का निजीकरण करना है। ग्राम पंचायतों ने एक-एक पैसा जोड़कर सरकारी स्कूलों की नींव रखी थी, जिसे मौजूदा सरकार अपनी मनमानी करके बंद करने पर तुली है। सरकार को शिक्षक भर्ती करने चाहिए न कि स्कूलों को मर्ज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में जल्द ही रोहतक उपायुक्त, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री से मिलकर समस्या का समाधान करवाया जाएगा। यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह आस-पड़ोस के गांवों की पंचायत करके सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
लाहली गांव में सुबह ग्रामीणों ने स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया था। इसके बाद उन्हें उच्च अधिकारियों के आश्वासन पर स्कूल का ताला खुलवाया गया। यदि दोनों स्कूलों के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाया जाता है तो साइंस और मैथ के अध्यापक की डिमांड बनती है, जब तक स्थायी समाधान नहीं होता तब तक जल्द ही अस्थायी रूप से शिक्षकों की व्यवस्था कर दी जाएगी। -सुशील भारती, खंड शिक्षा अधिकारी।