हरियाणा के रोहतक पीजीआईएमएस में एमबीबीएस की फीस पिछले दो वर्षों में 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 80 हजार रुपये कर दी गई है। नए सत्र से विद्यार्थियों को 9.20 लाख रुपये बॉन्ड भी अनिवार्य रूप से देना होगा। इसके बावजूद विद्यार्थियों के लिए संस्थान में सुविधाएं नहीं हैं।
पीजीआई में फीस बढ़ने के बाद भी सुविधा पहले वाली ही हैं। हालात ये हैं कि 50 कुर्सी वाले तंग कमरे में महज एक पंखा लगा है। कुर्सियां भी टूटी पड़ी हैं। दीवारों पर सीलन और फंगस है। ऐसे में विद्यार्थियों में सरकार और संस्थान प्रशासन के खिलाफ रोष पनप रहा है।
विद्यार्थियों के अनुसार एक ओर तो एमबीबीएस विद्यार्थियों पर मोटी रकम खर्च होने की बात की जा रही है तो दूसरी ओर फीस में बेहताशा वृद्धि के बावजूद सुविधाओं में रत्ती भर सुधार नहीं आया है। पीजीआईएमएस के निदेशक कार्यालय के पीछे बने पुराने भवन जर्जर हालात में हैं।
इसी में एमबीबीएस विद्यार्थियों की कक्षा लगती हैं। नए विद्यार्थियों को यहीं सबसे पहले चिकित्सा विज्ञान का क, ख, ग सिखाया जाता है। यहां विभिन्न विभागों के कमरों के ही हालात खस्ता नहीं हैं, लैब की भी यही स्थिति है। अनशनकारी विद्यार्थी इस बारे में अपने भाषण में साफ-साफ कह रहे हैं।
विद्यार्थियों से 80 हजार रुपये साल की फीस वसूलने के बावजूद सुविधाओं के नाम पर कोई सुधार नहीं किया जा रहा है। पहले यह फीस 50 हजार रुपये वार्षिक थी। अब सरकार ने नए सत्र से विद्यार्थियों पर 9.20 लाख रुपये की बॉन्ड राशि भी जमा कराने की बाध्यता भी लागू कर दी है।
संस्थान के एक शिक्षक ने बताया कि कक्षा व लैब के बुरे हालात हैं। कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। लिखित शिकायत भी दी गई, मगर सुधार नहीं हुआ है।
संस्थान के हॉस्टल भी हैं जर्जर हाल
विद्यार्थियों ने बताया कि लड़कों के छात्रावास सबसे दयनीय हाल में हैं। यहां सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। जबकि फीस 40 हजार रुपये सालाना वसूली जा रही है। छात्रावास की सफाई तो दूर यहां के शौचालय तक जर्जर हाल हैं। यहां कहीं दरवाजे नहीं हैं तो कहीं चिटखनी। रोशनदान टूटे हैं तो दरवाजे की जालियां उखड़ी पड़ी हैं। यहां की सुरक्षा व्यवस्था भी लचर है।
संस्थान में विद्यार्थियों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनमें समय-समय पर सुधार किया जाता है। नई सुविधाएं भी उन्हें मुहैया करवाई जा रही हैं।
-डॉ. एसएस लोहचब, निदेशक, पीजीआई।