हमें ऐसा नहीं होने देना है। पहले यूपी व हरियाणा के किसान अकेले थे। अब पंजाब का किसान भी साथ आ गया है। इससे लड़ाई तकनीकी रूप से भी मजबूत हुई है। हमें आंदोलन तो चलाना आता था लेकिन खाने-पीने की व्यवस्था नहीं आती थी। यह सिख भाइयों ने सिखाया है। इसीलिए नया गठबंधन बना है।
यह गठबंधन धरने को सफल बनाएगा। ये धरने फैसला करेंगे। हम भी देशभर में पंचायतें करेंगे। बंगाल भी जाएंगे। वहां भी बड़ी पंचायत कर किसानों को जागरूक बनाने का प्रयास करेंगे। न हमारा पंच बदलेगा न मंच। सिंघु बॉर्डर आज भी हमारा मंच है। वहीं 40 सदस्य कमेटी के नेता हमारे पंच हैं। इस मौके पर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, राजवान, अनिल नांदल, पूर्व विधायक सोमवीर सांगवान, महम विधायक बलराज कुंडू, विभिन्न खाप प्रतिनिधि समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
हम खुद लिखेंगे अपनी किस्मत : चढूनी
किस्मत एक शब्द है। इसका संधि-विच्छेद करें तो अर्थ होता है, किस मत। यानी किस सोच से हम काम करते हैं। यही हमारे आंदोलन पर लागू होता है। हम अपनी किस्मत खुद लिखेंगे। यह कहना है कि भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी का।
महापंचायत में पहुंचे किसान।
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उन्होंने कहा कि सर छोटूराम ने कहा था कि दो चीजें जरूर सीखें। एक बोलना और दूसरा लोगों की पहचान। प्रशासन या पुलिस के जवान हमारे दुश्मन नहीं हैं। इनसे हमें लड़ना नहीं है। अपना आंदोलन शांतिपूर्वक जारी रखना है। हां, चुनाव में जब भाजपा वाले आएं तो इन को वोट न देकर सबक जरूर सिखाएं। किसान आंदोलन हम सबका आंदोलन है। इसमें सभी मिलकर लड़े। पंजाब का हमें सहयोग मिल रहा है। हरियाणा के किसान लगातार आंदोलन में मदद कर रहे हैं।
मंच पर जगह बनाने की लगी होड़
बसंत पंचमी के दिन मंगलवार को सर छोटूराम स्मारक पर किसान महापंचायत कर चौधरी छोटूराम की जयंती मनाई गई। यहां भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी व राकेश टिकैत की मौजूदगी में लोगों में मंच पर जगह बनाने की होड़ लगी रही।
किसान महापंचायत में किसान नेता सरकार पर जमकर बरसे। कृषि कानूनों का विरोध करते हुए लोगों को इनके नुकसान से अवगत कराया। मंच से पंजाब व हरियाणा के भाईचारे व प्रेम को बनाये रखने पर जोर दिया गया। छोटूराम को नमन करते हुए वक्ताओं ने आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया।