17 भरत कालोनी में सिलाई कढ़ाई करती किरण (पीले वस्त्र में) व साथ मौजूद गीता (बीच में) एवं बबीता
रोहतक। शौक को अगर रोजगार का जरिया बना लिया जाए तो फिर सफलता के रास्ते खुद ब खुद खुलने लगते हैं। इसकी मिसाल रोहतक की किरण हैं जो ड्रेस डिजाइन कर अपना भविष्य संवार रही हैं।
सिलाई के शौक ने किरण को स्वरोजगार दे दिया है और वे अब ड्रेस डिजाइनर के रूप में जानी जाने लगी हैं। भरत काॅलोनी निवासी किरण बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 2017 में पहले पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान खरावड़ में खुद सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया और 2019 में अपना काम शुरू किया।
वह अब घर पर ही ड्रेस डिजाइनर के रूप में स्वरोजगार कर रही हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने साथ ही दो अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया है। वे अलग अलग डिजाइन की ड्रेस तैयार करती हैं और एक दिन में पांच जोड़ी ड्रेस तैयार कर देती हैं।
किरण बताती हैं कि इस स्वरोजगार से उनको प्रतिमाह 30 हजार रुपये तक आमदनी होने लगी है। वहीं दो गीता व बबीता का घर भी सिलाई कढ़ाई के काम से चल रहा है।
उनके इस कार्य की सराहना पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान खरावड़ के निदेशक मनजीत व सीनियर फैकल्टी पिंकी देवी ने भी की है। उनका कहना है कि अन्य महिलाओं ने भी इस प्रकार से निशुल्क प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार कर अपना भविष्य संवारना चाहिए।
मैंने सात साल पहले यहां भरत काॅलोनी में सिलाई कढ़ाई का काम सीखा था। अब मुझे इस काम से प्रतिमाह 6-7 हजार रुपये आमदनी हो रही है। -बबीता, महिला।
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छह साल से मैं यहां सिलाई का काम कर रही हूं। यहां रोजगार मिल रहा है और छह हजार रुपये तक आय होने लगी है। -गीता, महिला।