फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rohtak News: अकाल से उजड़ी जमीन पर 1200 साल पहले कैला नाई ने बसाया था किलोई

विज्ञापन
1-किलोई का कपिलेश्वर धाम। संवाद
विज्ञापन
विकास सैनी
विज्ञापन

रोहतक। कपिल मुनि की तपोभूमि किलोई का इतिहास बेहद प्राचीन और संस्कृति की जड़ें बेहद गहरी हैं। इस गांव के कण-कण में आस्था, संस्कृति और विज्ञान रची-बसी है। करीब 1200 साल पहले कैला नाई ने इस गांव को दोबारा बसाया था, जिसकी वजह से गांव का नाम किलोई रखा गया। आठ जोहड़ों वाले इस गांव में आज भी एक जोहड़ का नाम कैला है।
किलोई करीब 20,000 से अधिक आबादी वाला बड़ा गांव है। शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में दो पंचायतें हैं -किलोई दोपाना व किलोई खास। इस गांव को बास्केट बॉल खिलाड़ियों के गांव के रूप में भी जाना जाता है। आस्था के इस आंगन में महान कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामधन सिंह जैसे लोग भी पले हैं जिन्होंने भारतीय कृषि को गेहूं और दूसरे खाद्यानों की कई किस्में दीं। कृषि, विज्ञान और आध्यात्म के साथ ही यह गांव राजनीति , सामाजिक एकता व भाईचारे के मामले भी खास है।
विज्ञापन

1776 में खोदाई में मिला प्राचीन शिवलिंग और कपिलेश्वर धाम गांव को जहां आस्था का केंद्र बनाता है। यहां के शिव मंदिर को कपिलेश्वर धाम कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां कपिल मुनी ने पूजा-अर्चना की थी। धरती के गर्भ से निकले इस शिवलिंग को वैज्ञानिक करीब दो हजार साल पुराना मानते हैं।
-
अकाल से पहले किलोई धाम के दोनों तरफ बसे थे गुराना और खेड़ा गांव
प्राचीन शिव मंदिर किलोई (कपिलेश्वर धाम) में पिछली तीन पीढियों से सेवारत मंदिर समिति के पूर्व प्रधान सत्यवीर शास्त्री ने बताया कि किलोई गांव करीब 1200 वर्ष पुराना है। यह गांव किलोई धाम के साथ बसा है। किंवदंती के अनुसार करीब दो हजार वर्ष पूर्व यहां मंदिर की दक्षिण दिशा में गुराना व उत्तर में खेड़ा गांव होते थे। यहां अकाल पड़ने से ये दोनों गांव उजड़ कर हिसार चले गए। यहीं से कैला नाम के नाई ने शिव मंदिर से करीब दो किलोमीटर दूर किलोई बसाया। इन्हीं के नाम पर गांव का नाम किलोई पड़ा। बाद में जाट व अन्य समुदाय के लोग भी यहां आकर बस गए।

1776 में टीले में दबा मिला था शिवलिंग

मंदिर समिति के पूर्व प्रधान ने कहा कि 1776 में सेठ बख्शीराम गर्ग को पीपल के पेड़ के नीचे मिट्टी के टीले में दबा यह शिवलिंग मिला था। पुरातत्व विभाग के सर्वे के अनुसार भी यह शिवलिंग सैकड़ों साल पुराना है। शिवरात्रि पर यहां विशाल मेला लगता है। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शिरकत करते हैं।

गांव एक नजर में
- 20,000 से अधिक आबादी।
- 10,000 से अधिक मतदाता।
- 10,000 से अधिक बच्चे व युवा।
- 2 पंचायतें हैं। किलोई खास व किलोई दोपाना।
- 5 पानें-पांज्याण, मैदाण, चौधराण, राव्याण, बहराण हैं।
- 2 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।
- 1 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
- 1 पशु अस्पताल।
- 8 जोहड़। (कैला, काकरावाला, सुंडाला, डोभा, कटवाला, कोकिला व अन्य)


ग्रामीणों ने सुनाई गौरव गाथा


किलोई राजनीतिक, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहरों वाला गांव है। यहां का प्राचीन शिव मंदिर लोगों को धार्मिक आस्था से जोड़ता है। गांव ने अनेक अधिकारी, सैन्य अधिकारी व कर्मचारी भी दिए हैं। वर्ष 1910 में श्रीराम हुड्डा गांव के पहले तहसीलदार थे। -सत्यवीर शास्त्री, किलोई।

किलोई की सांस्कृतिक धरोहर व इतिहास काफी पुराना है। यहां 10 हजार से अधिक मतदाता हैं। बास्केटबॉल के लिए मशहूर गांव ने देश को रामधन सरीखा महान कृषि वैज्ञानिक दिया है। इनकी गेहूं की किस्में खास रहीं। -सोमवीर हुड्डा, किलोई।

गांव में शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक सभी तरह की सुविधाएं हैं। आबादी के हिसाब से यह बड़ा गांव है। दो पंचायतें होने के बावजूद गांव भौगोलिक सीमाओं में नहीं बंटा है। आपसी भाईचारा बना हुआ है। -हरिराम, किलोई।


किलोई में सैकड़ों वर्ष पुराना शिव मंदिर है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। खुद भी अपने परिवार के साथ पिछले चार साल से आ रहा हूं। यहां मांगी गई मन्नत पूरी होती है। आस्था से लोग जुड़े हुए हैं। -नितिन, रोहतक।
अकाल से उजड़ी जमीन पर 1200 साल पहले कैला नाई ने बसाया था किलोई
हेडिंग दो....अकाल के सन्नाटे से खिलखिलाती दो पंचायतों तक का सफर
सांस्कृतिक विरासत और आस्था का केंद्र है किलोई धाम, यहां करीब 2000 साल पुराना है शिवलिंग


लोगो : मेरा गांव, मेरी शान
फोटो : एक से आठ
विकास सैनी
रोहतक। कपिल मुनि की तपोभूमि किलोई का इतिहास बेहद प्राचीन और संस्कृति की जड़ें बेहद गहरी हैं। इस गांव के कण-कण में आस्था, संस्कृति और विज्ञान रची-बसी है। करीब 1200 साल पहले कैला नाई ने इस गांव को दोबारा बसाया था, जिसकी वजह से गांव का नाम किलोई रखा गया। आठ जोहड़ों वाले इस गांव में आज भी एक जोहड़ का नाम कैला है।
किलोई करीब 20,000 से अधिक आबादी वाला बड़ा गांव है। शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में दो पंचायतें हैं -किलोई दोपाना व किलोई खास। इस गांव को बास्केट बॉल खिलाड़ियों के गांव के रूप में भी जाना जाता है। आस्था के इस आंगन में महान कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामधन सिंह जैसे लोग भी पले हैं जिन्होंने भारतीय कृषि को गेहूं और दूसरे खाद्यानों की कई किस्में दीं। कृषि, विज्ञान और आध्यात्म के साथ ही यह गांव राजनीति , सामाजिक एकता व भाईचारे के मामले भी खास है।
1776 में खोदाई में मिला प्राचीन शिवलिंग और कपिलेश्वर धाम गांव को जहां आस्था का केंद्र बनाता है। यहां के शिव मंदिर को कपिलेश्वर धाम कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां कपिल मुनी ने पूजा-अर्चना की थी। धरती के गर्भ से निकले इस शिवलिंग को वैज्ञानिक करीब दो हजार साल पुराना मानते हैं।
-
अकाल से पहले किलोई धाम के दोनों तरफ बसे थे गुराना और खेड़ा गांव
प्राचीन शिव मंदिर किलोई (कपिलेश्वर धाम) में पिछली तीन पीढियों से सेवारत मंदिर समिति के पूर्व प्रधान सत्यवीर शास्त्री ने बताया कि किलोई गांव करीब 1200 वर्ष पुराना है। यह गांव किलोई धाम के साथ बसा है। किंवदंती के अनुसार करीब दो हजार वर्ष पूर्व यहां मंदिर की दक्षिण दिशा में गुराना व उत्तर में खेड़ा गांव होते थे। यहां अकाल पड़ने से ये दोनों गांव उजड़ कर हिसार चले गए। यहीं से कैला नाम के नाई ने शिव मंदिर से करीब दो किलोमीटर दूर किलोई बसाया। इन्हीं के नाम पर गांव का नाम किलोई पड़ा। बाद में जाट व अन्य समुदाय के लोग भी यहां आकर बस गए।

1776 में टीले में दबा मिला था शिवलिंग

मंदिर समिति के पूर्व प्रधान ने कहा कि 1776 में सेठ बख्शीराम गर्ग को पीपल के पेड़ के नीचे मिट्टी के टीले में दबा यह शिवलिंग मिला था। पुरातत्व विभाग के सर्वे के अनुसार भी यह शिवलिंग सैकड़ों साल पुराना है। शिवरात्रि पर यहां विशाल मेला लगता है। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शिरकत करते हैं।

गांव एक नजर में
- 20,000 से अधिक आबादी।
- 10,000 से अधिक मतदाता।
- 10,000 से अधिक बच्चे व युवा।
- 2 पंचायतें हैं। किलोई खास व किलोई दोपाना।
- 5 पानें-पांज्याण, मैदाण, चौधराण, राव्याण, बहराण हैं।
- 2 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।
- 1 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
- 1 पशु अस्पताल।
- 8 जोहड़। (कैला, काकरावाला, सुंडाला, डोभा, कटवाला, कोकिला व अन्य)


ग्रामीणों ने सुनाई गौरव गाथा


किलोई राजनीतिक, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहरों वाला गांव है। यहां का प्राचीन शिव मंदिर लोगों को धार्मिक आस्था से जोड़ता है। गांव ने अनेक अधिकारी, सैन्य अधिकारी व कर्मचारी भी दिए हैं। वर्ष 1910 में श्रीराम हुड्डा गांव के पहले तहसीलदार थे। -सत्यवीर शास्त्री, किलोई।

किलोई की सांस्कृतिक धरोहर व इतिहास काफी पुराना है। यहां 10 हजार से अधिक मतदाता हैं। बास्केटबॉल के लिए मशहूर गांव ने देश को रामधन सरीखा महान कृषि वैज्ञानिक दिया है। इनकी गेहूं की किस्में खास रहीं। -सोमवीर हुड्डा, किलोई।

गांव में शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक सभी तरह की सुविधाएं हैं। आबादी के हिसाब से यह बड़ा गांव है। दो पंचायतें होने के बावजूद गांव भौगोलिक सीमाओं में नहीं बंटा है। आपसी भाईचारा बना हुआ है। -हरिराम, किलोई।


किलोई में सैकड़ों वर्ष पुराना शिव मंदिर है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। खुद भी अपने परिवार के साथ पिछले चार साल से आ रहा हूं। यहां मांगी गई मन्नत पूरी होती है। आस्था से लोग जुड़े हुए हैं। -नितिन, रोहतक।
विज्ञापन

1-किलोई का कपिलेश्वर धाम। संवाद

1-किलोई का कपिलेश्वर धाम। संवाद

1-किलोई का कपिलेश्वर धाम। संवाद

1-किलोई का कपिलेश्वर धाम। संवाद

1-किलोई का कपिलेश्वर धाम। संवाद

1-किलोई का कपिलेश्वर धाम। संवाद

1-किलोई का कपिलेश्वर धाम। संवाद

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें