किलोई गांव में घर के पास में भरा गंदा पानी । संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। गांव किलोई में ऐतिहासिक शिव मंदिर और अन्य सुविधाएं है, लेकिन यहां की एक प्रमुख समस्या पानी निकासी की व्यवस्था सही से नहीं होना है। जिसके कारण ग्रामीण खासे परेशान रहते हैं। यह भी गांव की हालात तब है जब इस विधानसभा से चुना हुआ शख्स सूबे का 10 साल सीएम रहा है।
20 से 25 हजार की आबादी वाले इस गांव में 24 सौ मकान हैं। भालौठ की ओर से जाने पर गांव में दाखिल होते ही में ही खाली प्लाटों में जलभराव नजर आने लगता है। गांव में पक्के जोहड़ बने हैं। घरों में निकला गंदा पानी या तो खाली प्लाटों में जाता है या फिर जोहड़ में। कहने को तो गांव में पक्की सड़कें और गलियां हैं। कई जगह इन पर काम भी चल रहा है। लेकिन जो गांव में सबसे बड़ी कमी है वह है पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होना। ऐसे में आम दिनों के साथ सबसे ज्यादा परेशानी बारिश में होती है। पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से पानी गालियों में ही खड़ा हो जाता है। या फिर निचाई वाली जगहों में चला जाता है। गांव वालों की प्रशासन से मांग है कि गांव की आबादी के हिसाब से यहां पर पानी निकासी की सही से व्यवस्था की जाए।
गांव वाले बोले, जल निकासी की समुचित व्यवस्था हो
गांव निवासी युवा प्रवेश कुमार, देवेंद्र किलोई, बीरेंद्र और कुलदीप का कहना है कि गांव में न तो नालियां बनी है और न ही सीवरेज लाइन है। जिसके कारण गांव में जलभराव की समस्या बनी रहती है। जिसके कारण खाली जगह में जमा पानी पर मक्खी-मच्छर और जहरीले जीव पनपते हैं। जिससे गांव में बीमारी फैलने का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि खाली प्लाटों में जमा पानी में लोग कूड़ा-कचरा भी डाल देते हैं। जिससे उस दुर्गंध भी उठने लगती है। सरपंच के साथ कई बार एसडीएम से लेकर उपायुक्त तक से जल निकासी व्यवस्था कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
सरपंच ने भी भेजा है प्रस्ताव
सरपंच रामफल का कहना है कि उन्होंने गांव में सीवर लाइन डलवाने के लिए काफी प्रयास किया। निवर्तमान डीसी आरएस वर्मा के कहने पर पंचायत से प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा गया है। वह जो सड़कें बनवा रहे हैं, उसके साथ नालियों की भी व्यवस्था करते हैं ताकि घरों का पानी सड़क पर न भरे। फिलहाल जल निकासी की व्यवस्था उनकी प्राथमिकता में है।