कलानौर। जिले के अंतिम छोर पर बसा काहनौर गांव अपने गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सौहार्द के लिए जाना जाता है। यह गांव कलानौर से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित है। राजा भोज के वंशज कान्हा ने काहनौर गांव बसाया था।
गांव के निवासी दिलबाग, त्रिलोक व प्राण बताते हैं कि लगभग 800 वर्ष पहले 12वीं शताब्दी में राजा भोज के वंशज कान्हा और मसूदी इस क्षेत्र में आकर बसे थे। माना जाता है कि कान्हा ने काहनौर गांव की स्थापना की थी जबकि उनके भाई मसूदी ने निकटवर्ती मसूदपुर गांव बसाया था। इन्हीं दोनों भाइयों के नाम पर इन गांवों का नामकरण हुआ था।
गांव की प्रारंभिक आबादी में मुख्य रूप से ब्राह्मण समुदाय के परिवार निवास करते थे। वहीं, जाट समुदाय के लांबा गोत्र का परिवार सबसे प्रभावशाली माना जाता था। वर्तमान में इस परिवार की लगभग 10वीं पीढ़ी निवास कर रही है।
गांव में गुर्जर समुदाय के चार से पांच परिवार भी आकर बसे थे। इनके बारे में माना जाता है कि वे गुज्जरवास क्षेत्र से यहां आए थे। वहीं, जांगड़ा व अनुसूचित जाति के भी पांच से छह परिवार गांव में निवास करते थे। इन्होंने गांव के विकास व सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। गांव में मुख्य रूप से रांघड़ मुसलमान निवास करते थे जो वीरता और जांबाजी के लिए प्रसिद्ध थे। संवाद
मंदिर निर्माण के लिए पंडित राम राज ने गंवा दिए थे दोनों पैर
पंडित राम राज के प्रपौत्र आनंद शास्त्री बताते हैं कि ग्रामीणों के सहयोग से उनके परदादा ने प्राचीन शिव मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया था। मंदिर निर्माण के दौरान पूजा-अर्चना और शंखनाद किया जाता था लेकिन उस समय की परिस्थितियों के कारण निर्माण में कई बाधाएं आईं और कई बार मंदिर की दीवारों को नुकसान पहुंचाया गया। इसके बावजूद पंडित राम राज ने हार नहीं मानी और मंदिर निर्माण के अधिकार के लिए तत्कालीन लाहौर की अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी जिसमें उन्हें सफलता मिली और मंदिर का निर्माण पूरा हुआ था। लाहौर आने-जाने के दौरान एक रेल दुर्घटना में उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे लेकिन सनातन परंपरा और आस्था के लिए उनका संघर्ष जारी रहा।
काहनौर गांव एक नजर में
जनसंख्या : 10,000 से अधिक
मतदाता : 6,788
शैक्षणिक संस्थान : 03
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गांव में 10 चौपालें, 10 मंदिर और पांच तालाब
गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) काहनौर है। एक सामुदायिक भवन व 10 चौपालें हैं। गांव में पांच तालाब और 10 मंदिर हैं। दादू मठ गद्दी और प्राचीन शिव मंदिर गांव के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। तीन सरकारी स्कूल हैं। गांव में प्राथमिक, मिडल और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। गांव में हरियाणा ग्रामीण बैंक व स्टेट बैंक ऑफ इंडिया हैं। गांव में आठ श्मशान भूमि हैं।
लगभग 200 वर्ष पूर्व कलानौर से काहनौर गांव में दादू मठ गद्दी की स्थापना की गई थी। दादू मठ के प्रथम मठाधीश महंत स्वामी सारंग दास महाराज रहे जिन्होंने आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा की मजबूत नींव रखी थी।
- महंत रामप्रकाश महाराज, दादू मठ गद्दी, काहनौर
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काहनौर का प्राचीन शिव मंदिर सनातन परंपरा, आस्था और संघर्ष का प्रतीक है। पंडित राम राज ने मंदिर निर्माण के लिए कई कठिनाइयों का सामना किया और लाहौर की अदालत में कानूनी लड़ाई लड़कर मंदिर निर्माण का अधिकार प्राप्त किया था।
- आनंद शास्त्री, काहनौर।
गांव की सात-आठ पीढ़ी का ऑन रिकार्ड है। शुरुआत में ब्राह्मणों के चार-पांच घर के अलावा अन्य जातियों के मकान भी थे जिसमें अनुसूचित जाति के लोग भी भाईचारे से गांव में रहते थे। गांव का मुख्य व्यवसाय खेतीबाड़ी है। 320 मुरब्बा जमीन गांव के पास है।
- रामचंद्र लांबा, काहनौर।
गांव काहनौर की ब्राह्मण चौपाल में बैठे बुजुर्ग। संवाद
गांव काहनौर की ब्राह्मण चौपाल में बैठे बुजुर्ग। संवाद
गांव काहनौर की ब्राह्मण चौपाल में बैठे बुजुर्ग। संवाद
गांव काहनौर की ब्राह्मण चौपाल में बैठे बुजुर्ग। संवाद
गांव काहनौर की ब्राह्मण चौपाल में बैठे बुजुर्ग। संवाद