Jogendra Amar merges body punctuality with slogans
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महम। खरकड़ा का सपूत जोगेंद्र अब जुग-जुग जीएगा। ये कहना है शहीद की मां बेदो देवी का। बेदो देवी ने कहा कि उसकी कोख धन्य हो गई। बेशक अब उसकी दो बेटियों का भाई नहीं रहा। उसकी बहु का सुहाग खो गया। उसके दो पोतों के सिर से पिता का साया उठ गया, लेकिन उसका बेटा देश पर शहीद होकर अमर हो गया। वह अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रही है।
शहीद जोगेंद्र का शुक्रवार को गांव में सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके पार्थिव शरीर को मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ शहीद जोगेंद्र अमर रहे के नारों और लहराते राष्ट्रीय ध्वज के बीच विशेष रूप से बनाए गए शहीद स्थल तक लाया गया।
यहां शहीद को उनके पिता जयसिंह तथा दोनों पुत्रों पांच वर्षीय आर्यन तथा तीन वर्षीय समीर ने सलामी दी। जयसिंह स्वयं भी पूर्व सैनिक हैं। जब बेटे के पार्थिव शरीर से तिरंगा उतार कर उन्हें दिया गया तो वे भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। फिर भी कहा बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है।
मुखाग्नि देने से पहले उपमंडल के प्रशासनिक अधिकारियों सहित राजनेताओं और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। भाजपा नेता शमसेर खरकड़ा ने कहा कि शहीद के परिवार को सरकार की शहीदों की दी जाने वाली सभी सुविधाओं व लाभों के अतिरिक्त केंद्र सरकार तथा सेना की तरफ से भी सुविधाएं मिलेंगी।
धूल के कारण हुआ हादसा
जोगेंद्र के पार्थिव शरीर के साथ आए दीवान सिंह ने बताया कि राजस्थान में युद्धाभ्यास के दौरान वे शहीद हो गए। इस युद्धाभ्यास के बाद उसे ट्रेनिंग पर जाना था।
हिम्मत जुटाने का प्रयास कर रही थी पत्नी
शहीद जोगेंद्र की पत्नी सोनू को पति की शहादत पर गर्व है। लेकिन उनको याद कर वो भी बेसुध हो रही थीं। वो बार-बार कह रही थी कि बेटों को भी सेना में भेजेगी। दोनों बहनें सुमन व टीना के भी आंसू अविरल बह रहे थे। वो लगातार कह रही थीं कि उन्हें गर्व है कि अब वे शहीद के बहन कहलाएंगी।
बेखबर था बचपन
वहीं पिता की शहादत से इतर जोगेंद्र के पुत्र आर्यन व समर दोनों कभी रोने लगते तो लोग उन्हें खिलाने लग जाते। बस वे चुप हो जाते। उन्हें शायद पता ही नहीं था कि अब उनके सिर से पिता का साया उठ गया है। छोटे बेटे को बहलाया गया तो वह साइकिल चलाने लग गया।