चार साल की जद्दोजहद के बाद आखिरकार प्रदेश सरकार ने जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए रविंद्र के छोटे भाई के लिए नौकरी की मंजूरी दे दी। सरकार के फैसले के बाद परिवार में खुशी का माहौल तो है, लेकिन बड़े बेटे की शहादत का दर्द भी उनकी आंखों में झलकता है। परिवार का कोई भी सदस्य वह पल नहीं भूला पा रहा, जब बड़े बेटे ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी।
कमला नगर के रहने वाले रविंद्र पुत्र रणवीर सिंह वर्ष 2009 में सेना में भर्ती हुए थे। शहीद के छोटे भाई नवीन कुमार ने बताया कि पहली पोस्टिंग मथुरा में हुई थी, जिसके बाद उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में हो गई। देश की रक्षा करते हुए 10 जुलाई 2012 को रविंद्र ने कुपवाड़ा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनकी शहादत पर सेना की तरफ से छोटे भाई को नौकरी का ऑफर दिया गया, लेकिन रविंद्र की शहादत के बाद माता-पिता की देखभाल के लिए नवीन अकेला रह गया था। इस कारण परिवार ने नौकरी से मना कर दिया। हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कांग्रेस नेताओं ने नवीन को अपने स्तर पर नौकरी दिलाने का वादा किया था। तब से यह परिवार इसी उम्मीद में था कि सरकार कब नवीन को नौकरी देगी। करीब चार साल की अवधि के बाद अब जाकर कैबिनेट की बैठक में सरकार ने नौकरी को मंजूरी दी है।
नौकरी के लिए की ग्रेजुएशन, तीन जगह दिया इंटरव्यू
नवीन ने बताया कि बड़े भाई की शहादत के बाद कांग्रेस नेताओं ने नौकरी का आश्वासन दिया था। जिस समय भाई की शहादत हुई वह बीए फाइनल में था। कहा गया कि पढ़ाई पूरी कर लो, नौकरी मिल जाएगी। कुछ महीने बाद बीए पास होने पर उनका इंटरव्यू एग्रीकल्चर विभाग में कराया गया। इसके अलावा सब इंस्पेक्टर और लैब अटेंडेंट के पद के लिए भी पंचकूला में इंटरव्यू कराया गया, लेकिन कोई भी भर्ती क्लीयर नहीं हुई। इसके बाद कांग्रेस ने आचार संहिता का हवाला दे दिया। चुनाव के बाद भाजपा की सरकार आ गई। इस बीच लगा कि सरकार उनकी सुध नहीं लेगी लेकिन लंबे समय बाद ही सही, सरकार ने परिवार का ध्यान रखा।
परिवार में इतने सदस्य
शहीद रविंद्र के परिवार में उनके पिता रणवीर, माता रविंद्र, बड़ी बहन अंजू और छोटा भाई नवीन और उनकी पत्नी प्रियंका हैं। जिस समय रविंद्र शहीद हुए वह अविवाहित थे।
शहीद सैनिक के परिवार के प्रति सरकार का फैसला सराहनीय है। सभी पूर्व सैनिक इसके लिए सरकार का आभार जताते हैं। सरकार से अपील करते हैं कि भविष्य में भी पूर्व सैनिक और शहीदों के परिजनों का ध्यान रखा जाए।
- कैप्टन जगवीर मलिक, प्रवक्ता हरियाणा पूर्व सैनिक संघ