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जाटों ने घेरा आईजी आवास, बाोले- हमारे बच्चों को फंसाया तो गांव में आने वाली पुलिस को बंधक बना लेंगे

Tue, 19 Apr 2016 02:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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प्रदर्शन करते जाट - फोटो : अमर उजाला
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जाट आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव के बाद लगातार हो रही गिरफ्तारियों का विरोध तेज हो गया है। सोमवार को दर्जनों गांवों के जाट पुरुष-महिला ट्रैक्टर-ट्राली में भरकर आईजी आवास पर पहुंच गए। जाटों ने आईजी से आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों में जेल में बंद लोगों को छोड़ने और नाजायज रूप से किसी को भी न फंसाने की मांग की।
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ग्रामीणों ने चेतावनी भी दी कि यदि उनके बच्चों को झूठे केसों में फंसाया गया तो वे गांव में आने वाली पुलिस को भी बंधक बना लेंगे। वे किसी भी बेकसूर बच्चे को जेल नहीं जाने देंगे। मामला बढ़ता देख आईजी संजय कुमार ने जाट प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि परिजनों को सबूत दिखाकर ही उपद्रवी की गिरफ्तारी की जाएगी। आईजी के आश्वासन के बाद सभी ग्रामीण दोपहर ढाई बजे लौट गए। आईजी आवास पहुंचने से पहले जाट नांदल भवन में जुटे।

नहीं बनी सहमति
आईजी आवास पर आधा घंटे तक जाट प्रतिनिधियों ने आईजी से बातचीत की, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी। कुछ लोग जेल में बंद बेकसूर को भी छोड़ने की मांग कर रहे थे। कुछ लोगों का कहना था कि उनके बच्चों को पुलिस ने नाजायज फं साया है। इसके बाद आईजी ने उन लोगों से लिखित में शिकायत ली, जिनका आरोप था कि उनके बच्चे गलत तरीके से मुकदमों में फंसाया गया है। फिर आईजी ने कहा कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
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प्रतिनिधि बोले- वित्तमंत्री का घर ही नहीं पूरा शहर जला 
वहीं, वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ के मामले में लगातार कार्रवाई होने व अन्य मामलों में कार्रवाई नहीं होने पर जाट प्रतिनिधि गुस्से में नजर आए। उन्होंने कहा कि शहर में केवल वित्तमंत्री की कोठी ही नहीं जलाई गई है, बल्कि पूरे शहर को जलाया गया है। ऐसे में पुलिस केवल एक ही मामले में कार्रवाई कर रही है, जबकि अन्य मामलों में कोई भी गिरफ्तारी नहीं कर रही। 

सैकड़ों घरों में भेज रखे हैं नोटिस 
पुलिस ने मामले में इन गांवों के सैकड़ों घरों में नोटिस भेज रखे हैं ताकि जिन लोगों के नाम सामने आ रहे है उन्हें जांच में शामिल किया जा सके। इसके अलावा कुछ लोगों को बिना नोटिस के भी सबूत के आधार पर गिरफ्तार किया जा चुका है। जाट समाज का कहना है कि कुछ नोटिस तो उन लोगों को भेजे गए हैं, जिनका आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था। 

इन गांवों के लोग पहुुंचे
आईजी आवास पर करीब 500 से 700 जाट पहुंचे थे। इनमें महिला और बुजुर्ग भी शामिल रहे। इसमें गांव टिटौली, बोहर, खरैंटी, सिसरौली, सुंदरपुर और सांघी सहित अन्य गांव की जाट महिला व बुजुर्ग शामिल थे।  
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