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तीन केस दर्ज करने के बाद हैंडओवर के लिए कोर्ट पहुंची सीबीआई 

Sat, 15 Oct 2016 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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जाट आरक्षण का सीन - फोटो : file photo
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आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई आगजनी और हिंसा के संबंध में तीन केस दर्ज करने के बाद सीबीआई शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर जीवन की अदालत में पेश हुई। सीबीआई ने कोर्ट में अपनी ओर से दर्ज तीनों एफआईआर से संबंधित दस्तावेज पेश करते हुए तीनों केस सीबीआई अदालत में ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई। अदालत में पेश हुए अधिकारियों ने बताया कि तीनों मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। मामले में शनिवार को सुनवाई होगी। इस संबंध में कोर्ट ने सीबीआई और बचाव पक्ष के वकील को नोटिस जारी कर दिए हैं। 
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कुछ समय पहले वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी के मामले में आठ आरोपियों की जमानत याचिका कोर्ट में दायर की गई थी। इस पर वित्तमंत्री के वकील श्रीराम निवास हुड्डा ने विरोध किया था। उन्होंने अदालत मेें कहा था कि इस केस के अलावा दो अन्य मामलों की जांच जल्द सीबीआई कर सकती है। इस पर अदालत ने सीबीआई को नोटिस जारी कर पूछा था कि वह कब तक मामलों की जांच शुरू करेगी।

इसी का जवाब देने के लिए सीर्बीआई के डीएसपी राजबीर सहित एक इंस्पेक्टर शुक्रवार को अदालत में पेश हुए। दोनों अधिकारियों ने अदालत में मंगलवार को दर्ज तीनों एफआईआर के दस्तावेज पेश किये। कई घंटे तक अदालत में मामले की सुनवाई चलती रही।  
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आरोपी पक्ष के वकील ने किया विरोध 
अदालत पहुंचे आरोपियों के वकील प्रदीप मलिक ने कहा कि उनके मुवक्किल की जमानत पर सुनवाई इसी अदालत में होनी चाहिए। भले ही जांच सीबीआई को सौंप दी गई हो। मलिक ने कहा कि सीबीआई खुद कह रही है कि जो ट्रायल स्थानीय अदालत में चल रहा है, वही ट्रायल सीबीआई अदालत में चलेगा। इससे जमानत याचिका पर सुनवाई का अधिकार भी सीबीआई कोर्ट के पास चला जाएगा। 

ये है पेच 
वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी के मामले में आरोपी राजेश रूखी, योगेश्वर दत्त, जोगेंद्र जोगी सहित आठ आरोपियों ने स्थानीय कोर्ट में जमानत याचिका लगा रखी है। इनकी याचिका पर शनिवार को सुनवाई होगी। जबकि सीबीआई केस को सीबीआई अदालत में ट्रांसफर करने की मांग कर चुकी है। आरोपी पक्ष का मानना है कि मामला यदि सीबीआई कोर्ट में चला गया तो आरोपियों की जमानत पर तलवार लटकती सकती है। यही वजह रही कि आरोपियों के वकील प्रदीप मलिक ने आरोपियों की जमानत पर सुनवाई स्थानीय कोर्ट में ही करने की अपील की। 

ये है मामला 
वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी के मामले में एफआईआर नंबर 118 में वित्तमंत्री के भतीजे ने 40 लोगों को नामजद किया था, जबकि जांच में कई अन्य नाम सामने आए थे। वित्तमंत्री की कोठी के मामले में दूसरी एफआईआर नंबर 65 को वहां के गार्द के इंचार्ज की ओर से दर्ज कराया गया था, जिसमें कोई नामजद नहीं था। दोनों मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी।

एसआईटी के इंचार्ज सिद्धार्थ ढांडा को बनाया गया था। दोनों एफआईआर में अभी तक 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से कइयों को जमानत मिल चुकी है। फरार चल रहे 19 लोगों को कोर्ट से वारंट जारी हो चुके हैं। दिल्ली बाईपास पर सर्किट हाउस व आईजी आवास पर गोली चलाने के साथ ही आगजनी की एफआईआर नंबर 45 पीजीआई थाने में दर्ज की गई थी। इसमें पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि कोई नामजद नहीं है। 
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