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जाट संस्था की वार्डबंदी ने बांट दिए परिवार

Wed, 02 Sep 2015 02:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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 अगर आप जाट शिक्षण संस्था के वोटर हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। तीन साल पहले हुई वार्डबंदी का उस समय तो कोई खास असर दिखाई नहीं दिया, लेकिन इस बार वार्डबंदी को लेकर खुलकर विरोध हो रहा है। संस्था की कुर्सी पाने की जुगत में लगे संभावित प्रत्याशियों के बीच तो आपसी तालमेल न होना एक सामान्य बात है, लेकिन जाट संस्था की वार्डबंदी ने तो परिवारों को ही बांटकर रख दिया। अमर उजाला ने इस वार्डबंदी का गहनता से मंथन किया तो ऐसे एक नहीं, बल्कि ढेरों उदाहरण सामने आए।
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जाट शिक्षण संस्था में 105 वार्ड हैं। इसमें लगभग पंद्रह हजार वोटर हैं। 2012 में चुनाव से एक माह पूर्व संस्था में योजनाबद्घ तरीके से वार्डबंदी करा दी गई थी, जिसे वोटरों के नामों के हिसाब से बांटा गया था। इस प्रक्रिया ने परिवारों के सदस्यों को ही अलग-अलग वार्डों में बांट दिया।
 यानि पति की वोट किसी वार्ड में तो पत्नी की किसी दूसरे वार्ड में। उस समय इस वार्डबंदी का विरोध इसलिए नहीं हुआ कि एक माह बाद ही चुनाव करा दिए गए। ऐसे में अधिकतर मतदाता वार्डबंदी का खेल ही नहीं समझ पाए, लेकिन इस बार वार्डबंदी का मामला पेचीदा होता दिखाई दे रहा है। बोहर गांव की वार्डबंदी देखें तो यह गांव वार्ड 37 से शुरू होकर 46 तक पहुंचता है। यानि एक ही गांव को नौ वार्डों में बांट दिया गया।
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 वोटर संख्या 6716 पर वीरेंद्र वार्ड नंबर 46 के प्रत्याशी को वोट देगा तो उसके बेटे जितेंद्र को वार्ड नंबर 40 में वोट देनी होगी। अनिता को वार्ड एक का वोटर बनाया गया है तो उसके पति राजेंद्र को वार्ड 35 का। अब देखना यह है कि योजनाबद्घ तरीके से हुई वार्डबंदी पर ही इस बार चुनाव कराया जाता है या फिर प्रशासक इसमें कोई बदलाव करेंगे।

180 किलोमीटर तक जाना होगा वोट मांगने
तत्कालीन गवर्निंग बॉडी द्वारा कराई गई वार्डबंदी के खेल में इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों को काफी पसीना बहाना पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर वार्ड 1 की बात करें तो यहां पर 147 वोट हैं। इस वार्ड में कुछ हिस्सा भिवानी का जोड़ा गया है तो बाकी हिस्सा 130 किलोमीटर दूर दिल्ली का जोड़ दिया गया है। इसी तरह वार्ड 2 भिवानी में 129 वोटर हैं तो इसी वार्ड में 18 वोटर फरीदाबाद के जोड़े गए हैं।

दोनों के बीच की दूरी लगभग 180 किलोमीटर हैं। वार्ड 3 में गुड़गांव की 37 वोट हैं तो हिसार की 74। दोनों की दूरी करीब 170 किलोमीटर है। इसी प्रकार वार्ड 5 में बहादुरगढ़ और बादली भागलपुर आदि को जोड़ा गया है। वार्ड 27 में रोहतक और पानीपत के वोटरों को जोड़ दिया गया। दोनों के बीच की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। ऐसे में प्रत्याशी को वोट मांगने के लिए कभी दिल्ली तो कभी भिवानी जाना पड़ेगा।

एक ही दहलीज पर पहुंचेंगे कई-कई प्रत्याशी
वार्डबंदी के कारण परिवार तो बंटकर रह ही गए, लेकिन इनके साथ-साथ प्रत्याशियों की भी कुछ कम मुसीबत नहीं है। झज्जर जिले के गांवों पर नजर डालें तो यहां के वोटर वार्ड 3 से शुरू होकर 25 तक पहुंचते हैं। कई मामले तो ऐसे भी हैं, जिनमें परिवार एक ही दहलीज के अंदर रह रहे हैं, लेकिन वोटर अलग-अलग वार्ड के होने के नाते वहां पर वोट मांगने के लिए कई-कई प्रत्याशियों को जाना होगा।

इसी के फेर में गिरी तत्कालीन गवर्निंग बॉडी की सत्ता
इस तरीके से की गई वार्डबंदी का काफी समय से विरोध हो रहा है। आरोप था कि तत्कालीन गवर्निंग बॉडी ने अपने फायदे के लिए इस तरह वार्डबंदी कराकर वोटरों को मोहरा बनाया था। इसकी शिकायत लगातार सोसायटी रजिस्ट्रार से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक की गई। यहीं कारण रहा कि जुलाई में समय से पहले ही तत्कालीन गवर्निंग बॉडी को भंग कर दिया गया था।

यूं बोले आजीवन सदस्य
आजीवन सदस्य एडवोकेट चंचल नांदल का कहना है कि जिस तरह की वार्डबंदी जाट संस्थाओं में की गई है वह सरासर गलत है। अभी तक देश की किसी भी सोसायटी, पंचायत या विधानसभा में ऐसी कोई वार्डबंदी नहीं है। वार्डबंदी को एरियावाइज कराया जाना चाहिए।
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