विवादों में घिरी जाट एजुकेशन सोसायटी की गवर्निंग बॉडी को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही भंग कर दिया गया है।
लगातार शिकायतों के बाद सरकार की तरफ से गवर्निंग बॉडी को भंग कर प्रशासक नियुक्त किया गया है। प्रशासक के तौर पर सोसायटी की जिम्मेदारी अब डीसी के पास रहेगी।
जाट एजुकेशन सोसायटी की गवर्निंग बॉडी और विपक्षी खेमे के बीच काफी समय से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा था। मामला सरकार तक पहुंचा। 10 जुलाई को सरकार की तरफ से गवर्निंग बॉडी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
इसमें गवर्निंग बॉडी से 10 दिन के अंदर जवाब मांगा गया था, लेकिन 10 दिन की अवधि पूरी होने से पहले ही बृहस्पतिवार देर रात प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव एवं उद्योग व वाणिज्य विभाग देवेंद्र सिंह की तरफ से डीसी ऑफिस में फैक्स भेजा गया। इसमें जाट एजुकेशन सोसायटी की गवर्निंग बॉडी को भंग करने की पुष्टि की गई थी और प्रशासक के तौर पर आगामी एक वर्ष के लिए उपायुक्त को सोसायटी की जिम्मेदारी दी गई। शुक्रवार सुबह ही डीसी कार्यालय से फैक्स की कॉपी जाट एजुकेशन सोसायटी के पदाधिकारियों को भी भेज दी गई। गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल 7 अगस्त को पूरा होना था। समय से पहले बॉडी भंग होने से विपक्षी खेमे में खुशी का माहौल है तो पदाधिकारियों में मायूसी।
इन शिकायतों पर हुई कार्रवाई
- कॉलेजियम सदस्य और जनरल बॉडी की मीटिंग समय पर नहीं कराई गई।
- पदाधिकारियों की तरफ से चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।
- संस्था के स्कूल-कॉलेजों में परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और नजदीकियों को नियुक्त करना।
- रोक के बावजूद संस्था में गेस्ट शिक्षकों को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू करना।
- वोटरों की सूची में एरिया वाइज वार्डबंदी नहीं करना।
कुछ इस तरह लिए गए थे रोक के बावजूद साक्षात्कार
विपक्ष की तरफ से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद तत्कालीन रजिस्ट्रार की तरफ से जाट एजुकेशन सोसायटी में नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई थी। इसके लिए सोसायटी को लिखित में भी पत्र जारी किया गया, लेकिन जुलाई की शुरुआत में ही जाट कॉलेज और एमकेजेके कॉलेज में गेस्ट टीचरों को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस पर सोसायटी के अधिकारियों ने तर्क दिया था कि नया सत्र शुरू हो चुका है, ऐसे में शिक्षकों की कमी के चलते गेस्ट शिक्षक लगाए जा रहे हैं, जो नियमानुसार है।