जसराना माइनर मंगलवार सुबह कंसाला मोर खेड़ी के पास टूट गई। इससे करीब 100 एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। सूचना पाकर विभाग की टीम मौके पहुंची और दोपहर 2 बजे नहर की मरम्मत कर व्यवस्था दुरुस्त की। इधर, भैंसरू के पास भी मंगलवार दोपहर नहर टूट गई। प्रशासन ने समय रहते सूचना मिलने पर पानी का बहाव बंद कर नहर को दुरुस्त किया।
सिंचाई विभाग ने जलघरों को भरने के लिए दो दिन पहले सभी माइनरों में पानी छोड़ा था। मंगलवार सुबह करीब 5 बजे बुर्जी नंबर 6400 के पास नहर की पटरी टूट गई। पानी के बहाव से करीब 15 फीट की दूरी में पटरी बह गई। माइनर का सारा पानी खेतों में बहने लगा। इससे करीब 100 एकड़ गेहूं की फसल में पानी भर गया। बेलदार ने माइनर टूटने की खबर आलाधिकारियों को दी। इसके बाद हेड से पानी बंद किया। बुल्डोजर व मजदूरों की मदद से पटरी की मरम्मत की।
किसानों का कहना है कि नहर टूटने से गेहूं की फसल डूब गई। खेतों में पानी जमा होने से फसल बर्बाद हो गई है। अब दोबारा बिजाई करने का भी समय नहीं है। किसान बबलू, अशोक कुमार, नहाना, पवन कुमार, जितेंद्र, संजय, जसवीर, सोनू ने बताया कि कंसाला माइनर हर वर्ष नहर टूट रही है। गत वर्ष भी 25 नवंबर को इसी स्थान पर नहर टूटी थी। वर्ष 2023 में भी यहां से नहर टूटी थी। इस वजह से किसानों को हर साल लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। प्रशासन इस संबंध में कोई भी ठोस कदम नहीं उठा रहा है। किसानों ने सरकार से डूबी फसल की गिरदावरी कर मुआवजा देने की मांग की है।
क्या कहते हैं अधिकारी
सिंचाई विभाग के एसडीओ उदयभान सिंह सांगवान का कहना कि माइनर में जलघर के लिए पानी छोड़ा गया था। पटरी कमजोर होने की वजह से टूट गई। इसे ठीक कर दिया गया है। खेतों से पानी निकासी के लिए पंप लगाया गया है। बुधवार को दो पंप ओर लगाए जाएंगे, ताकि जल्द पानी निकल सके।