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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा का मामला

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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में वीरवार को एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। क्योंकि वकीलों ने हैदराबाद की घटना के विरोध में कोर्ट के अंदर वर्क सस्पेंड किया हुआ था। अब शुक्रवार को अदालत में मामले को लेकर बहस होगी।
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फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश के अंदर रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार, कैथल व भिवानी जिलों में जगह-जगह हिंसा हुई थी। 23 फरवरी को भिवानी निवासी कैप्टन पवन ने सिविल लाइन थाने केस दर्ज कराया था कि पूर्व सीएम हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर विरेंद्र सिंह की एक आडियो वायरल हुई है। जिसमें प्रोफेसर विरेंद्र फोन पर दलाल खाप के तत्कालीन प्रवक्ता मानसिंह दलाल से बातचीत कर रहे है। इससे आंदोलन भड़क और हिंसा हुई। पुलिस ने देश द्रोह जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्रोफेसर के खिलाफ केस दर्ज किया। बाद में कांग्रेस नेता रहे जयदीप धनखड़ व मान सिंह दलाल भी आरोपी बनाए गए। तीन साल बाद तीनों के खिलाफ पुलिस ने 2019 में चार्जशीट दाखिल की। उस चार्जशीट को पिछली सुनवाई पर प्रोफेसर व धनखड़ ने चुनौती दी थी। साथ ही अदालत से आरोपों को खारिज करने की मांग की थी। अदालत ने 4 दिसंबर तक पुलिस से जवाब मांगा था। साथ ही पांच दिसंबर की तिथि बहस के लिए तय की थी, लेकिन पांच दिसंबर को अदालत में वकीलों के वर्क सस्पेंड के चलते बहस नहीं हो सकी। अब छह दिसंबर को अदालत में प्रोफेसर व धनखड़ की अर्जी पर बहस होगी।
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