53-डॉ. अंजलि मलिक
- फोटो : इंदिरा नगर फायर स्टेशन में बने आवास पर कई साल पुराना पेड़ गिरा।
रोहतक। एमडीयू के मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. अंजली मलिक का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा है, जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं। एक रास्ता बंद होता है तो कई नए रास्ते खुलते हैं। छात्रों को चाहिए कि वे अपने रुचि और क्षमता के अनुसार आगे की दिशा चुनें और सकारात्मक सोच बनाए रखें।
परीक्षा परिणाम आने के बाद कई छात्र-छात्राएं अपने अंकों को ही अपनी काबिलियत का पैमाना मान लेते हैं। कम अंक आने का मतलब यह नहीं कि आपके सपनों की उड़ान थम गई है। इतिहास गवाह है कि मनमाफिक अंक न पाने वाले भी आगे चलकर सफलता के ऊंचे मुकाम तक पहुंचे हैं।
अगर आपके अंक अपेक्षा से कम आए हैं तो खुद को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी कमियों को समझें और उन्हें सुधारने की दिशा में आगे बढ़ें। यह समय खुद को संभालने और नई रणनीति बनाने का है, न कि निराश होने का। एक परीक्षा आपके पूरे भविष्य का फैसला नहीं कर सकती।
मनोवैज्ञानिक सहायता भी है जरूरी
डॉ. अंजली बताती हैं कि रिजल्ट के बाद यदि छात्रों के व्यवहार में बदलाव, उदासी, भूख में कमी या अकेलापन महसूस हो रहा है तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के टोल फ्री नंबर 14416 पर संपर्क किया जा सकता है जहां 24 घंटे विशेषज्ञ काउंसिलिंग के लिए उपलब्ध रहते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे इस समय बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं, उन्हें समझें और उनका मनोबल बढ़ाएं। नकारात्मकता से दूर रखते हुए बच्चों को यह अहसास दिलाना जरूरी है कि असफलता भी सीखने का एक हिस्सा है। जो होना था वह हो चुका है, अब आगे बढ़ने का समय है। मेहनत, आत्मविश्वास और सही दिशा के साथ हर छात्र अपने सपनों को जरूर पूरा कर सकता है।