संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। सांग सार्वजनिक जीवन में प्रेरणा देने की पद्धति है। लख्मी चंद और अनेक सांग प्रेमियों ने इसे जीवंत किया। कला के माध्यम से संस्कार व परंपरा को समझना जरूरी है। ये बातें शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने वीरवार को डीएलसी सुपवा के सांग समागम में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स में वीरवार को सांग समागम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सांग मंडलियों ने सांग प्रस्तुतियां दी। मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि सांग पद्धति को समझना चाहिए।
सांग के कलाकारों का सुर, ताल व अभिनय जनता को जोड़ता है। अभिनय की खूबसूरती यही है कि संदेश भी जाए, कला भी दिखाई जाए और बदलाव भी किया जाए। सांग में रागनी, संवाद और अभिनय भी है।
उन्होंने कहा कि अब बुराइयों को कला के माध्यम से काटकर युवाओं को उतारा जाए। सुपवा में पढ़ रहे विद्यार्थी अभिव्यक्ति, कला, आत्मा व पहचान को सीखने के लिए आए हैं। कला सिर्फ टेक्निक नहीं, यह आत्मा की आवाज है।
इस दौरान पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, हरियाणा राज्य सूचना आयुक्त अमरजीत सिंह, कुलपति डॉ. अमित आर्य, कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक, एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह, एनसीजेडसीसी के सदस्य अजय गुप्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष रणबीर ढाका, एलपीएस बोसार्ड के प्रबंध निदेशक राजेश जैन आदि मौजूद रहे।
टेक्सटाइल नगरी के साथ समझौता करिए : ढांडा
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि टेक्सटाइल नगरी के साथ समझौता करिए। विश्वविद्यालय में कला की कोई कमी नहीं है। हर क्षेत्र में हमारा युवा एक नंबर पर हो। पेंटिंग, कला, गायन, सांग व रागनी आदि में प्रतिभावान बनें। कोई ये न कहे कि यहां के युवाओं में कमी है। विद्यार्थियों की प्रतिभा देश दुनिया में दिखनी चाहिए। हमारे नौजवानों की प्रतिभा का कोई मुकाबला नहीं है। कैंपस में नहीं इससे बाहर भी प्रतिभा दिखाने का प्रयास करिए। काम दिखा तो दुनिया अच्छा बोलेगी।