फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अस्पताल बनवाना केंद्रीय राज्य मंंत्री का फर्ज : अजय सिंह यादव

Tue, 05 Aug 2025 12:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
विज्ञापन
फोटो : 11धरने को संबोधित करते पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव। संवाद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


रेवाड़ी। पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव ने रामगढ़ भगवानपुर में 200 बेड का सरकारी अस्पताल बनवाने की मांग को लेकर चल रहे धरने को सोमवार को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का संघर्ष पूरी तरह जायज और लोकतांत्रिक है। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत राव हों या विधायक लक्ष्मण यादव, सभी का फर्ज बनता है कि वे मिलकर इस अस्पताल को बनवाएं।

उन्होंने कहा कि उम्मीद करता हूं कि उन लोगों को भगवान सद्बुद्धि दे। क्योंकि जब किसी व्यक्ति का समय खराब आता है, तो उसकी बुद्धि भी विपरीत दिशा में काम करने लगती है। उनका इशारा राव इंद्रजीत पर था।
विज्ञापन

पूर्व मंत्री ने कहा कि कई दिनों से ग्रामीण संघर्ष कर रहे हैं और यह आंदोलन पूरी तरह से न्यायोचित है। पहले भी यहां आया था। इतिहास गवाह है कि एम्स भी तभी बना था जब वहां के लोगों ने संघर्ष किया था।
कहा कि जब एक बार अस्पताल की घोषणा हो चुकी थी और जमीन भी निर्धारित हो चुकी थी, तो फिर गोकलगढ़ और शाहबाजपुर में नई जगहें तलाशना समझ से परे है।
कहा कि जब जनता ने निस्वार्थ भाव से जमीन दे दी है, तो अब टालमटोल क्यों?। उन्होंने रेवाड़ी के हालात पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज हालत यह है कि रेवाड़ी शहर में हर तीसरे दिन पानी आता है, लेकिन ग्रामीणों ने फिर भी अस्पताल के लिए मुफ्त में ज़मीन दे दी।
जब हमने शहर में कालाका की जमीन ली थी, तो वहां मुआवजा दिलाया था। लिसान में वाटर वर्क्स बना, वहां भी मुआवजा मिला। यहां सब कुछ निशुल्क देने के बाद भी सरकार कोई काम नहीं कर रही। पूर्व मंत्री ने कहा कि उनका मकसद केवल ये कहना है कि जब जनता सब कुछ दे रही है, तो फिर सरकार का काम न करना दुखद और निंदनीय है।
विज्ञापन



धरनास्थल पर मौजूद वक्ताओं ने कहा कि भगवानपुर की जमीन अस्पताल के लिए सबसे उपयुक्त है, क्योंकि यह एनएच-71 पर स्थित है और तीन ओर से सड़क संपर्क में है। साथ ही यह स्थान प्रस्तावित बस स्टैंड प्रजापति चौक से महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। धरने में सोमवार को बुड़ाना, बुड़ानी, फिदेड़ी, सुनारिया, फदनी, मीरपुर, मांढैया कला, गोकलपुर समेत कई गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। महिलाओं की भागीदारी भी रही।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें