झज्जर। डेंगू के मरीजों का जहां सरकारी अस्पताल में फ्री इलाज हो रहा है, वहीं प्राइवेट अस्पताल में लोगों को अपनी जेबें ढीली करनी पड़ती हैं। मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए भी रोहतक या निजी ब्लड बैंकों में जाना पड़ता है।
जिले में अब तक डेंगू के 14 मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जिले में मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों के फ्री में टेस्ट किए जाते हैं। प्लेटलेट्स के लिए भी कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ती। वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट अस्पताल में डेंगू के इलाज के लिए मरीजों को मोटी रकम चुकानी पड़ती है।
डेंगू के मरीज को इलाज के लिए करीब पांच से सात दिन तक अस्पताल में दाखिल रखा जाता है। एक दिन के लिए बेड और डॉक्टर के चैकअप और नर्सिंग और खाने के लिए के लिए जरनल वार्ड में 4800 रुपये, आईसीयू के 10500, प्राइवेट रूम 6500 और सेमी-प्राइवेट रूम का खर्चा 6200 रुपये होता है। इसमें टेस्ट और दवाईयों का दो से तीन हजार का अतिरिक्त खर्चा होता है। जो आमजन के लिए ज्यादा है, वहीं, डेंगू के टेस्ट प्राइवेट अस्पतालों में करीब 400 रुपये में होता है।
जिले में नहीं है प्लेटलेट्स की सुविधा
सरकारी अस्पताल ने ब्लड सेपरेशन मशीन को पिछले करीब डेढ़ साल से लाइसेंस के लिए अप्लाई किया हुआ है, लेकिन अभी तक लाइसेंस नहीं मिला है। अप्रैल में टीम ने भी दौरा किया था। इसकी वजह से मरीजों के लिए प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं है। जिन मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है, उन्हें रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। जहां फ्री में मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती हैं। वही, प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवा रहे मरीजों के लिए भी रोहतक से प्लेटलेट्स मंगवाई जाती हैं। इसके लिए करीब मरीज को 11 हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं।
बीपीएल परिवार को वापस मिल जाती है राशि
यदि कोई मरीज निजी अस्पताल में इलाज कराता है और उसे 11 हजार रुपये की प्लेटलेट्स लेकर आता है। उसे यह राशि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से रिफंड कर दी जाती है। इसके लिए मरीज को स्वास्थ्य विभाग के पास आवेदन करना होता है।
वर्जन
प्लेटलेट्स के लिए रोहतक रेफर कर दिया जाता है। निजी अस्पतालों के लिए रेट 11 हजार रुपये तय किए गए हैं। यदि कोई बीपीएल मरीज है तो उसे राशि रिफंड भी कर दी जाती है।
-डॉ. तीर्थ बागड़ी, जिला मलेरिया अधिकारी, झज्जर