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चिकित्सा पद्धति में नैतिक सिद्धांतों को शामिल करना अनिवार्य : कुलपति

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रोहतक। यूएचएस डीन एकेडमिक अफेयर्स विभाग की ओर से संस्थान के पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए बायोएथिक्स कोर्स के तीसरे बैच का शुभारंभ कुलपति डाॅ. एचके अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के एनएमसी की गाइडलाइन के तहत यह कोर्स शुरू किया गया है।
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यहां पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सकों से कुलपति ने कहा कि हमेशा मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार रखें। नए चिकित्सक के लिए बायोएथिक्स का ज्ञान होना जरूरी है। इससे उनका मरीज के प्रति होने वाले बर्ताव में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि चिकित्सा पद्धति में नैतिक सिद्धांतों को शामिल करना अनिवार्य हो गया है।
डाॅ. अग्रवाल ने कहा कि हमारे पास मरीजों की बहुत ज्यादा संख्या है, ऐसे में हमें खुद को इतना सक्षम बनाना चाहिए कि हम सभी मरीजों की बातों को ध्यान से सुनते हुए उनका अच्छे से इलाज कर सकें। साथ ही उन्हें अपनी बात समझा सकें। हमें मरीज को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदान करना चाहिए। डीन एकेडमिक अफेयर्स डाॅ. ध्रुव चौधरी ने कहा कि एनएमसी की गाइडलाइन के तहत यह प्रदेश का तीसरे कोर्स विश्वविद्यालय की ओर से कराया जा रहा है। किसी भी पीजी को अपनी परीक्षा पास करने के लिए यह कोर्स करना जरूरी है। डाॅ. जितेंद्र जाखड़ ने बताया कि 45-45 पीजी छात्रों का एक बैच बनाकर यह कोर्स कराया जा रहा है। वहीं डाॅ. आरती ने कहा कि हमें अपने चिकित्सक से अधिक से अधिक प्रश्न पूछ कर अपनी जिज्ञासाओं को शांत करना चाहिए। बाॅयो एथिक्स का मेडिकल के क्षेत्र में बहुत ज्यादा महत्व है।
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