रोहतक। मकर और कर्क राशि में सूर्य के उत्तरायण होने के दिन पर मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत भी होती है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार से नए वर्ष की शुरुआत होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार मकर संक्रांति का महाभारत के साथ भी संबंध बताया गया है। राजा शांतुनु और देवी गंगा के पुत्र भीष्म पितामह थे, जिन्होंने महर्षि परशुराम से शास्त्र विद्या प्राप्त की। भीष्म पितामह अपने अंतिम समय में 58 दिनों तक बाणों की शैया पर रहे। मगर शरीर नहीं त्यागा क्योंकि उनकी इच्छा थी जिस दिन सूर्य उत्तरायण होगा, उसी दिन वह अपना शरीर त्याग करेंगे और ऐसा ही हुआ था।
रविवार रात 2 बजे से पुण्यकाल की शुरुआत होगी। अगले दिन 15 जनवरी को सुबह 9 बजे तक किया हुआ पवित्र स्नान शुभ काल में माना जाएगा। इस दिन घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना शुभ होता है।
- पंडित बाल कृष्ण शर्मा, विश्व नाथ मंदिर, इंद्रप्रस्थ कॉलोनी।
त्योहार संस्कृति से जुड़े रहने के लिए मनाए जाते हैं। इस दिन घर के बुजुर्गोंका आशीर्वाद लेते हुए भेंट में कपड़े दिए जाते हैं। आधुनिक समय में त्योहार ही हैं, जो हमें अपनी परंपरा से जोड़े हुए हैं।
- नीरज देवी।
सुबह पुण्यकाल में स्नान करना घर के बुजुर्ग शुभ बताते हैं। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति से नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। घर पर चावल व चने की दाल की खिचड़ी बनाई जाती है और सूर्य को भोग लगाया जाता है।
- कोमल भुटन।