फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rohtak News: सिस्टम की विवशता से न्याय कमजोर न हो, यह देखना भी अदालत की जिम्मेदारी...

विज्ञापन
विज्ञापन
रोहतक। अदालत ने 14 साल की मंदबुद्धि लड़की के साथ हुई छेड़छाड़ के केस में गवाहों के मुकरने के बावजूद आरोपी को दोषी करार देते हुए पांच साल कैद और 1500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने टिप्पणी की कि सिस्टम की विवशता से न्याय कमजोर न हो, यह देखना भी अदालत की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने अवलोकन में कहा है कि अपराध के खिलाफ न्याय समाज की मांग है। ऐसे में अदालत को अपराध के अनुरूप सजा देनी चाहिए।
विज्ञापन

पीड़ित पक्ष की वकील रेणू शास्त्री ने बताया कि महम थाने में वर्ष 2021 में एक नाबालिग के पिता ने केस दर्ज कराया। बताया था कि उसकी एक नाबालिग बेटी है, जिसकी उम्र मात्र 14 साल है। गांव का युवक उसे बहला-फुसलाकर जलघर के पास ले गया। वहां पर उसके साथ गलत काम करने का प्रयास किया। साथ में छेड़छाड़ की। इसी बीच ग्रामीणों ने उसे दबोच लिया। पुलिस ने आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास और पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया।

अपनों भी छोड़ा साथ, लेकिन पीड़िता के इशारे को माना कोर्ट ने सबूत
पीड़ित पक्ष की वकील ने बताया के केस में 20 गवाह बनाए गए थे, जिसमें छह लोग परिवार के ही सदस्य थे। केस की सुनवाई के दौरान छह गवाह बयानों से पलट गए। मंदबुद्धि होने के कारण पीड़िता बोल नहीं सकती थी। उसने इशारों में आरोपी को पहचान लिया। साथ ही गर्दन हिला कर उत्पीड़न की हां भरी। कोर्ट ने दर्ज एफआईआर और पीड़िता की इशारे में की गई हां को सही मानते हुए आरोपी को पांच साल कैद की सजा सुनाई।
विज्ञापन


यह केस दूसरों से अलग रहा। पीड़िता के पिता के कहने में पर मैंने केस लड़ा। हालांकि बाद में परिवार के सदस्य ही गवाही से मुकर गए। अदालत में फिर भी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए केस लड़ा। कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
विज्ञापन

एडवोकेट रेणू शास्त्री, पीड़िता की वकील
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें