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पूर्व उपराज्यपाल के इलाज में लापरवाही की जांच शुरू

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पीजीआईएमएस में उपचार के लिए आई पुंडुचेरी की पूर्व उप राज्यपाल चंद्रावती के मामले पर कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके आधार पर संस्थान के तीन सीनियर डॉक्टरों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच टीम ने सोमवार को कई डॉक्टरों से लिखित में बयान लिए हैं।
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पीजीआईएमएस के आपात विभाग में उपचार के लिए आई पुंडुचेरी की पूर्व उप राज्यपाल चंद्रावती के मामले के बाद संस्थान के अधिकारियों ने प्रोटोकाल के तहत वार्ड एक में वीवीआईपी के लिए कमरे रिजर्व कर दिए हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमजी वशिष्ठ ने कुलपति डॉ. ओपी कालरा के निर्देशों पर यह व्यवस्था की है। गौरतलब है कि अभी तक वीवीआईपी मरीजों के लिए प्रोटोकाल के तहत वार्ड 24 में चार स्पेशल रूम रिजर्व रहते थे। लेकिन कोरोना के संक्रमणकाल में इन्हें कोरोना के मरीजों व आइसोलेशन वार्ड के रूप में रिजर्व कर लिया गया था। जारी निर्देशों को चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की ओर से विभिन्न विभागाध्यक्षों, यूनिट हैड, नर्सिंग सुपरीटेंडेंट आदि कार्यालयों में भेज दिया गया है।
कूल्हे की हड्डी में चोट लगने के कारण चरखीदादरी से उपचार के लिए पीजीआईएमएस आपात विभाग आई महिला को समय पर न तो उपचार दिया गया और न ही प्रोटोकाल के तहत उन्हें अन्य मरीजों से अलग रखने की व्यवस्था की गई। मरीज के परिजन परेशान होकर रात को ही शहर के निजी अस्पताल में चले गए। निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने मरीज को दो ऑपशन दिए, इसमें आपरेशन व दूसरा खींच लगाना बताया। इस पर पूर्व उपराज्यपाल ने खींच लगवाने पर अपनी सहमति जताई और आराम होने पर वह वापस घर चली गई। इस मामले में पूर्व उपराज्यपाल की ओर से संस्थान को कोई शिकायत नहीं दी गई। लेकिन मामले को एमडीयू के छात्र नेता व इनसो के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल ने सोशल मीडिया पर उठाया, इसके बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी इसे मुद्दे पर नाराजगी जताई।
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ये डॉक्टर कर रहे मामले की जांच
- डॉ. शमशेर सिंह लोहचब
- डॉ. संजीव नंदा
- डॉ. राजेश रोहिल्ला
उपचार के दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर व स्टाफ के लिए जा रहे बयान
जांच टीम ने सोमवार को ड्यूटी पर तैनात स्टाफ व डॉक्टरों के लिखित बयान लिए हैं। एक दो दिन में इसकी जांच रिपोर्ट टीम को कुलपति को सौंपनी है। इसमें जांच का विषय यह होगा कि पूर्व उपराज्यपाल का ट्रीटमेंट किसने किया, सीनियरों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। इसके अलावा जांच के बाद संभव हो कि प्रोटोकाल के तहत नॉन कोविड मरीजों के लिए कोई वार्ड रिजर्व किया जाए। क्योंकि अबसे पहले संस्थान दावा करता आ रहा था कि जब भी उन्हें अलग वार्ड की जरूरत होगी, वह तुरंत तैयार करवा देंगे। लेकिन मौके पर चूक हो गई।
पूर्व राज्यपाल के साथ हुए मामले की जांच चल रही है। उस दौरान ड्यूटी पर रहने वाले डॉक्टरों का बयान दर्ज किया गया है, जिसकी रिपोर्ट जल्द ही वीसी को सौंप दी जाएगी।
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- डॉ.शमसेर सिंह लोहचब, वरिष्ठ हृदय शल्य चिकित्सक पीजीआई जांच कमेटी के चेयरमैन
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