अंतरराष्ट्रीय स्तर के राजीव गांधी खेल परिसर के हालात अब नाम बड़े और दर्शन छोटे, सरीखे हो चले हैं। जिले में करीब 12 वर्ष पहले 151 करोड़ की लागत से बने अत्याधुनिक स्टेडियम में खिलाड़ी बिजली, पानी व शौचालय की मूलभूत सुविधाओं तक को तरस गए हैं। शौचालय बदहाल हैं तो पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। रात को खेल परिसर में अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में खिलाड़ियों के साथ बड़ा हादसा होने का भी डर बना रहता है।
देश-दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन करने वाले इलाके के खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधा मुहैया कराने के लिए तत्कालीन सरकार ने रोहतक में स्टेडियम का निर्माण कराया था। इस खेल परिसर में हर खेल का अत्याधुनिक सुविधा संपन्न मैदान बनाया गया था। इस स्तर के खेल मैदान पहली बार खिलाड़ियों को मिले। पिछले 12 वर्ष में इनकी देखरेख सही ढंग से नहीं हुई, जबकि इन मैदानों पर युवा लगातार अपना हुनर तराशने के लिए पसीना बहाते रहे। यहां खेलना खुद को चोटिल करने से कम नहीं है।
स्केटिंग ट्रैक पर गड्ढे बने हैं। आसपास झाड़ियां उगी हैं। हॉकी मैदान का एस्ट्रोटर्फ घिसकर उखड़ने लगा है। वाॅलीबॉल, बास्केटबॉल, तीरंदाजी, क्रिकेट, फुटबॉल समेत अन्य खेल मैदानों में गड्ढे बने हैं। सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक भी फटने लगा है। इस पर दौड़ना जोखिम उठाने से कम नहीं है। या यूं कहें कि बगैर सुविधाएं खेल प्रतिभाएं अपने बूते निखर रही हैं। सरकार खेलों व खिलाड़ियों को सुविधा मुहैया कराएं तो पदकों की भरमार लग सकती है।
राजीव गांधी खेल स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए बना है। यहां उनके लिए सभी तरह की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। पिछले कुछ समय से खेल मैदानों की ठीक से मरम्मत नहीं हो पाई है। इस कारण कुछ दिक्कत है। सरकार से बजट मंजूर होते ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
- देवेंद्र सिंह, जिला खेल अधिकारी।