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Rohtak News: अकबरकालीन पांडुलिपि द्वादश भाव पर अंतरराष्ट्रीय पुस्तक प्रकाशित

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18. एमडीयू के दृश्य कला विभाग में कुलपति प्रो. मिलाप पूनियां को अपनी शोधपरक पुस्तक भेंट करती एस - फोटो : बाइक सवार को टक्कर मारने वाली बस को पकड़कर जांच करते उपनिरीक्षक व उतरते यात्री।
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रोहतक।
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजलि दूहन ने मंगलवार को अपनी शोधपरक पुस्तक कुलपति प्रो. मिलाप पूनियां को भेंट की। द्वादश भाव: संस्कृत कथा का मुगल संस्करण शीर्षक है। पुस्तक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक ब्रिल और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी शिमला के सहयोग से प्रकाशित हुई है।
कुलपति ने कहा कि इस तरह का शोध भारतीय कला, इतिहास और साहित्य की समृद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने डॉ. अंजलि दूहन को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं।
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डॉ. अंजलि दूहन ने बताया कि यह पुस्तक मुगल सम्राट अकबर के समय (लगभग 1596 ई.) की एक दुर्लभ चित्रित पांडुलिपि द्वादश भाव पर आधारित है। यह पांडुलिपि समय के साथ अलग-अलग हिस्सों में बिखर गई थी और इसके चित्र निजी संग्रहों में चले गए थे।
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उन्होंने पहली बार इस बिखरी हुई कृति को एकत्रित कर उसका लिप्यंतरण और अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत किया है। पुस्तक में इस पांडुलिपि का पुनर्निर्माण करने के साथ-साथ उस समय भारत में संस्कृत ग्रंथों के फारसी अनुवाद की परंपरा का भी विश्लेषण किया गया है। इससे मुगलकालीन अनुवाद प्रक्रिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को समझने में नई जानकारी मिलती है।
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