भारतीय प्रबंधन संस्थान रोहतक में हुई एचआर समिट में शामिल विभिन्न कंपनियों के एचआर। स्रोत : संस्
रोहतक। भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) की सालाना एचआर समिट में मानव संसाधन (एचआर) की नए दौर में चुनौतियों पर खुलकर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज कंपनियों को सहानुभूति और चुस्ती के दोहरे दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर एचआर को पुनः परिभाषित करना होगा। विकल्पों के बीच प्रेरित करने और सही दिशा में बनाए रखने में भी कई चुनौतियां हैं।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में एचआर की रणनीतिक भूमिका विषय से समिट की शुरुआत हुई। विभिन्न कंपनियों के एचआर हेड ने 300 से अधिक छात्रों-शिक्षकों के बीच कार्यस्थल की बदलती भूमिका, तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन पर जोर दिया। वैश्विक बदलावों के अनुरूप एचआर की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की।
आईआईएम निदेशक प्रो. धीरज शर्मा ने कहा, आज हम अभाव से परिभाषित राष्ट्र नहीं हैं। आज लोगों के पास आराम और नौकरियों के कई विकल्प हैं। चुनौती यह है कि हम उन्हें कैसे प्रेरित करें, सही दिशा में बनाए रखें।
पहले सत्र में नेतृत्व की पुन: परिभाषा : जटिलता, परिवर्तन और सहयोग के साथ दिशा पर वक्ताओं ने विचार रखे। इसमें विश्लेषण किया गया कि पारंपरिक पदानुक्रम से हटकर नेतृत्व अब किस प्रकार अधिक चुस्त और भावनात्मक रूप से बुद्धिमान हो गया है। यह नवाचार को प्रोत्साहित करने, नैतिक बने रहने और साझा उद्देश्यपूर्ति के बारे में है।
दूरी, विविधता और दिशा : वैश्विक मानव संसाधन प्रबंध के नए नियम के सत्र में टीम प्रबंधन की वास्तविकताओं पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने वैश्विक संदर्भों का हवाला देकर एचआर प्रथाओं के विकास पर बल दिया।
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