विजेंद्र कौशिक
रोहतक। प्रदेश में इनेलो ताऊ देवीलाल की जयंती के बहाने फिर से खुद को खड़ा करने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए अभय चौटाला कांग्रेस के गढ़ रोहतक से 25 सितंबर को ‘घर वापसी’ मुहिम की शुरुआत करेंगे। वह ताऊ देवीलाल व ओमप्रकाश चौटाला के समय के पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से पार्टी से जोड़ने का अभियान चलाएंगे। अभय चौटाला यहां बड़ी रैली करके हुड्डा के साथ दुष्यंत पर सियासी निशाना लगाना चाहते हैं।
ताऊ देवीलाल व ओमप्रकाश चौटाला के समय के कार्यकर्ता जजपा से दूर होकर इनेलो के साथ वापस आ जाएं और हुड्डा से जुड़ा रोहतक का जाट फिर से इनेलो से जुड़ जाए। पुराने कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़ने के लिए खुद अभय चौटाला 8 सितंबर को रोहतक आ रहे हैं।
इनेलो 2004 के बाद से प्रदेश की सत्ता से बाहर है। फिर भी सबसे ज्यादा बार मुख्यमंत्री ताऊ देवीलाल के परिवार से रहा है। खुद ताऊ देवीलाल 1977 व 1987 में मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला 1989, 1990, 1991, 1999 व 2000 में मुख्यमंत्री बने।
वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में पार्टी 31 व 2014 में 19 हलकों में विजयी रही थी। ताऊ की 2018 में सोनीपत के गोहाना में 105वीं जयंती पर हुई रैली में पार्टी में फूट पड़ गई और दुष्यंत समर्थकों ने अभय चौटाला की हूटिंग कर दी थी।
इसके बाद इनेलो से टूटकर अभय के बड़े भाई अजय चौटाला के नेतृत्व में नई पार्टी जजपा बनी। जजपा ने 2019 के विधानसभा चुनाव में 10 सीट जीतकर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। इनेलो 81 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद एक सीट जीत सकी थी। 2024 के विधानसभा चुनाव में इनेलो दो सीट जीतने में कामयाब रही लेकिन जजपा का सफाया हो गया।
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यह रहा इनेलो का प्रदेश में प्रदर्शन
लोकसभा चुनाव
वर्ष चुनाव लड़ा सीट वोट मिले
2024 7 2 2,26,975
2019 10 0 2,40,258
2014 10 2 27,99,899
2009 5 0 12,86, 573
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विधानसभा चुनाव
2024 51 2 5,75,192
2019 81 1 3,06,028
2014 88 19 29, 96, 203
2009 88 31 24, 47, 147
नोट आंकड़ा : चुनाव आयोग की साइट से
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रोहतक में 2004 के बाद नहीं खुला इनेलो का खाता
ताऊ देवीलाल ने रोहतक जिले की महम विधानसभा सीट से 80 के दशक में जीत की हैट्रिक लगाई थी। 1989 में रोहतक लोकसभा सीट भी जीती थी। 2004 में पार्टी हसनगढ़ व महम सीट जीतने में कामयाब हुई थी। 2009, 2014, 2019 व 2024 में पार्टी जिले में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। रोहतक लोकसभा सीट पर 1999 के बाद इनेलो को जीत नहीं मिली।
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रोहतक जाट राजनीति की राजधानी है। रोहतक में जनाधार बढ़ाकर इनेलो एक साथ दो लक्ष्य हासिल करना चाहती है। पहला हुड्डा को कमजोर किया जाए और दूसरा पुराने जाट वोट बैंक को फिर से अपने साथ जोड़ा जाए। रोहतक में ताऊ देवीलाल का अच्छा प्रभाव रहा है। यही कारण है कि इनेलो रोहतक में ताऊ देवीलाल की जयंती पर रैली कर रही है।
- डाॅ. सतीश त्यागी, राजनीतिक विश्लेषक