रोहतक। आमतौर पर लोगों में खांसी, जुकाम आदि की वजह बनने वाला इनफ्लुएंजा इस बार काफी घातक बनकर लौटा है। यह कोरोना नहीं है। पीजीआईएमएस की ओपीडी में इसके शिकार लोगों की संख्या 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई है। नए एच3-एन2 का संक्रमण दर पुराने से 20 प्रतिशत की तुलना में 50 प्रतिशत है। यह रेबो न्यूक्लिक एसिड (आरएनए) टाइप संक्रमण इतना खतरनाक है कि यदि एक व्यक्ति संक्रमित हो जाए तो वह घर के आधे सदस्यों को बीमार कर सकता है। इसके लक्षण कोरोना से मिलते हैं इसलिए समस्या बढ़ गई है। कोरोना की तरह ही आरटीपीसीआर टेस्ट से ही इसकी पुष्टि होती है। राहत की बात यह है कि इसका इलाज संभव है, क्योंकि वैक्सीन उपलब्ध है।
कोरोना के तीन साल बाद इनफ्लुएंजा नए रूप में लौटा है। कोरोना की तरह ही रूप बदलने में माहिर यह संक्रमण पहले से ढाई गुणा खतरनाक होकर लौटा है। इस संक्रमण के कारण गला खराब होना, जुकाम, खांसी, फेफड़े व नाक की समस्याएं, दमा बिगड़ना और निमोनिया के केस बढ़ रहे हैं। पीजीआई की सुपर स्पेशलिटी ओपीडी में सोमवार को करीब 400 मरीज पहुंचे। इनमें 125 से ज्यादा मरीज रेस्पिरेटरी विभाग के थे। रोजाना ओपीडी में ऐसे मरीजों की तादाद बढ़ रही है। ऐसे मरीजों में गला खराब, जुकाम, खांसी, दमा व ब्रोंकाइटिस बिगड़ने के अलावा निमोनिया की शिकायत आम है। संक्रमण के कारण कान में पानी और साइनस की समस्या बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले तीन साल से इनफ्लुएंजा के केस नहीं आ रहे थे, लेकिन इस बार फिर दिखाई दिया है।
कोविड से मिलते-जुलते लक्षण
इनफ्लूएंजा की पहचान सामान्य तौर पर मुश्किल है। इसकी वजह इसके लक्षणों का कोरोना से मेल खाना है। खांसी, जुकाम, गला खराब, ब्रोंकाइटिस, सांस की नली संबंधित दिक्कतें आदि इसके लक्षणों में शामिल हैं। इसके बावजूद इसकी पहचान संभव है। इनफ्लूएंजा में निमोनिया पहले सप्ताह में आता है, जबकि कोरोना दूसरे सप्ताह में आता है। इनफ्लूएंजा में गला लंबे समय तक खराब रहने के अलावा खांसी भी कोरोना में लंबे समय रहती है। इसमें खांसी छह से आठ सप्ताह तक रह सकती है। ऐसे मामलों में आरटीपीसीआर जांच कराना जरूरी है, जो पीजीआईएमएस में उपलब्ध है।
1918 और 2009 में बन चुका है महामारी
इनफ्लूएंजा 1918 में सामान्य फ्लू के रूप में महामारी का कारण बना था, तब काफी मौतें हुई थीं। 2009 में भी यह स्वाइन फ्लू के रूप में काफी घातक बन गया था। अब कुछ साल बाद एक बार फिर यह खतरनाक बन कर लौटा है।
बचाव के लिए मास्क लगाना जरूरी
इस मौसम में इनफ्लूएंजा गला, नाक, कान, खांसी, जुकाम, निमोनिया की वजह बना हुआ है। नए एच3-एन2 संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति घर के दूसरे लोगों को भी बीमार बना रहा है। इसमें मास्क पहनना व वैक्सीन लगवाना जरूरी है। पुराने संक्रमण के मुकाबले नया वायरस ढाई गुणा अधिक अटैक रेट के साथ आया है। बीमारी की पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर जांच कराना जरूरी है। पीजीआई में यह सुविधा उपलब्ध है। वैक्सीन उपलब्ध होना राहत की बात है।
- डॉ. ध्रुव चौधरी, एचओडी, पलमोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसन विभाग, पीजीआईएमएस।