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भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन रिसर्च का तीसरा फेज पूरा

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जिला सामान्य अस्पताल में टीकाकरण के दोरान गेट पर तापमान चेक करते हुए। संवाद - फोटो : RohtakCity
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रोहतक। भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन रिसर्च का तीसरा चरण वीरवार को पूरा हो गया। इसमें देश भर के रिसर्च सेंटरों ने 25,800 वालंटियर्स को वैक्सीन की डोज लगा दी है। अकेले पीजीआईएमएस ने इसमें से 460 वालंटियर को वैक्सीन की डोज लगाई। वैक्सीन लगाने के बाद किसी वालंटियर को कोई स्वास्थ्य हानि नहीं हुई। यह वैक्सीन जनवरी में किसी भी समय स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों, नर्सों व कर्मचारियों को लगाई जा सकती है। प्रदेश में इसके लिए ड्राइ रन भी पूरा हो चुका है।
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पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने 2018 में जुलाई, सितंबर व नवंबर में कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल में अपने वालंटियरों को वैक्सीन लगाई है। 19 नवंबर को तीसरे चरण की शुरूआत की गई थी। इसके तहत 25,800 वालंटियरों को यह वैक्सीन दी जानी थी, इसमें से संस्थान ने 460 को वैक्सीन की डोज लगाई है। वीरवार को तीसरा फेज पूरा होने पर रिसर्च करने वालों ने खुशी जताई है। बताया जा रहा है कि मार्च के पहले सप्ताह में वैक्सीन की रिसर्च पूरी हो जाएगी। इसके बाद स्पष्ट हो जाएगा कि वैक्सीन लगने के बाद यह कितने समय कारगर रहेगी। इसके अलावा समय बीतने के साथ यह भी पता चलेगा कि एक बार वैक्सीन लगने के बाद इसका असर कितना लंबा समय रहेगा।
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चरण पीजीआई ने वैक्सीन दी कुल वालंटियर
एक 80 375
दो 50 380
तीन 460 25800
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कोवैक्सीन या कोविशिल्ड
देश में कोवैक्सीन व कोविशिल्ड को मंजूरी मिली है। इसमें सबसे अधिक विश्वसनीय प्रदेश में कोवैक्सीन को माना जा रहा है। इस वैक्सीन का ट्रायल पीजीआईएमएस ने अपने स्थानीय लोगों पर किया है। वहीं दावा किया जा रहा है कि कोवैक्सीन के ट्रायल में सबसे अधिक वालंटियर्स की संख्या अभी तक सभी वैक्सीनों में सबसे अधिक रही है। ऑक्सफोर्ड की कोविशिल्ड भी तीसरे चरण में 23 हजार के करीब ही लोगों को रिसर्च में शामिल कर चुकी है। इसे इंडिया में सेफ्टी ऑफ इम्नोजेनेस्टी का और एफिकेसी का डॉटा बाहर का दिया गया है, इसके बाद इसे मान्यता दी गई है।
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बोले अधिकारी
कोवैक्सीन रिसर्च के पहले दो फेज की सफलता के बाद तीसरा फेज शुरू किया गया था, जोकि पूरा हो गया है। अब सभी परिणाम मार्च तक आ जाएंगे। कोवैक्सीन के साथ कोविशिल्ड को भी देश में मंजूरी मिली है। वैक्सीन सबसे पहले हेल्थ से जुड़े लोगों को लगाई जाएगी। रिसर्च पर खुशी है कि कम समय में सुरक्षा के सभी दृष्टिकोणों को ध्यान में रखते हुए तीनों फेज पूरे हो गए हैं। वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर कोई संदेह नहीं है अब इसकी क्षमता को देखना बाकी है।
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- डॉ. रमेश वर्मा, को-इन्वेस्टिगेटर कोवैक्सीन रिसर्च एवं प्रोफेसर, पीजीआईएमएस
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