संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। किसानों की मांग के अनुसार जिले में फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। जिले में 1,13000 हेक्टेयर में धान की खेती होती है। पराली प्रबंधन के लिए पूरे जिले में 995 सुपर सीडर, दो स्ट्रॉ बेलर और 295 कंबाइन हार्वेस्टर ही उपलब्ध हैं। किसानों ने पूरे जिले के लिए इन इंतजामों को नाकाफी बताया है। वहीं, कृषि विभाग के एसडीओ संदीप कुमार का दावा है कि फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनें पर्याप्त हैं। किराये पर भी किसानों को मशीनें दी जाती हैं। किसानों की मांग पर दूसरे जिलों से भी मशीनें मंगवाई जाती हैं।
अगर पराली व फसल अवशेषों का समय पर बंदोबस्त नहीं किया गया तो किसान उसका अन्य तरीके से इस्तेमाल करेंगे। कुछ किसान फसल अवशेषों में आग लगाकर नियमों की अवहेलना करने पर भी मजबूर होंगे। ऐसे में बढ़ते एक्यूआई के बीच पराली का प्रबंधन कैसे हो पाएगा।
फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) के लिए सरकार स्कीम के तहत कृषि यंत्रों पर अनुदान देती है। इस वर्ष स्कीम के तहत अलग-अलग श्रेणी की 10 मशीनों के लिए कुल 451 लाभपात्र हैं। विभाग के अनुसार, इन सभी की मशीनों खरीदने के बाद सब्सिडी की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, अधिकारियों ने किसानों तक मशीनें पहुंचने का दावा किया है।
साल 2023 में बंद हो चुकीं 812 मशीनें
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 2020 से 2023 तक तीन वर्षों में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अलग-अलग कार्य की 1915 मशीनें उपलब्ध थीं। इनमें 812 मशीनें काम करना बंद चुकी हैं जबकि शेष 1103 मशीनें अलग-अलग श्रेणी की चालू हालत में हैं। इसके बाद 2023-2024 से अब तक कुल 1060 मशीनें चालू हालत में हैं। वहीं, किसान इनकी संख्या कम बता रहे हैं। विभाग के अनुसार, एक मशीनें तीन साल तक अच्छे से काम करती है।
फसल अवशेष योजना की मशीनें
कृषि अधिकारियों ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन, बेलिंग मशीन, हैप्पी सीडर, हाइड्रोलिक रिवसिबल एमबी हल, मुल्चर, झाड़ी मास्टर-स्लेशर, स्ट्रॉ बेलर, सुपर सीडर, सुपर एसएमएस, जीरो टिल सीड ड्रिल व रोटावेटर मशीनें सब्सिडी पर किसानों को दी जाती हैं।
-
क्या है सुपर सीडर मशीन
सुपर सीडर मशीन का काम धान के फसल अवशेषों को काटना, मिट्टी तैयार करना और बीज बोना। यह मशीन किसानों को पराली जलाए बिना गेहूं जैसी फसलें बोने में मदद करती है। इससे समय और लागत की बचत होती है और पर्यावरण को लाभ होता है।
जिले में धान क्षेत्र के अनुसार फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनें पर्याप्त संख्या में हैं। किसानों को इनका लाभ भी मिल रहा है। किराये पर भी किसानों को मशीनें दी जाती हैं। किसानों की मांग के अनुसार दूसरे जिलों से भी मशीनें मंगवाई जाती हैं।
- संदीप कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
किसानों को जरूरत के समय मशीनें उपलब्ध होनी चाहिए। ऐसा तब संभव होगा, जब जिले में किसानों के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनें प्रर्याप्त हों। विभाग तो मशीनें पर्याप्त बता देगा लेकिन पूरी तरह चालू हालत में उपलब्ध नहीं हैं।
- सुमित दलाल, सचिव, किसान सभा।
विभाग की ओर अनेक प्रकार की शर्तें लगाई गई हैं जो प्रत्येक किसान को पूरा करना मुश्किल है। ये मशीनें बहुत से किसानों की पहुंच से दूर हैं, क्योंकि इनकी कीमत बहुत अधिक है। पराली प्रबंधन के लिए कोई विशेष प्रबंध नहीं है। समय अनुसार तो मशीन मिलती तक नहीं।
- जोगिंद्र, किसान, बनियानी
08...सुमित दलाल, सचिव, किसान सभा।