रोहतक। दादा लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (डीएलसी सुपवा) में सिने फाउंडेशन हरियाणा के सहयोग से फिल्म कार्यशाला के चौथे दिन विद्यार्थियों को कैमरे के लिए अभिनय और ऑडियोग्राफी की जानकारी दी गई।
साथ ही विद्यार्थियों को व्यावहारिक फिल्म निर्माण का अभ्यास कराया गया। इसमें प्रतिभागियों ने परिसर में लघु फिल्में बनाईं। कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. अनूप ने कहा कि रंगमंच में अभिनेता मंच का मालिक होता है।
सिने फाउंडेशन हरियाणा के सहयोग से फिल्म कार्यशाला में शुक्रवार को सुबह के सत्र में अभिनय की बारीकियां सिखाई गईं। संचालन अभिनेता व दिल्ली विश्वविद्यालय की संस्कृति परिषद के अध्यक्ष डॉ. अनूप लाठर ने प्रतिभागियों को अभिनय की मूल बातें सिखाईं।
उन्होंने बताया कि अभिनय एक ऐसा कौशल है जिसे सीखा और निखारा जा सकता है। अभिनेता भावनाओं का मुखौटा पहनते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप उस पल में वास्तव में क्या महसूस कर रहे हैं। जरूरी यह है कि आप उस मुखौटे को कितनी कुशलता से धारण करते हैं।
डॉ. लाठर ने छात्रों को अभिनेताओं के लिए एक ऑन कैमरा टूलकिट से परिचित कराया जिसमें निरंतरता, तकनीकी सहजता, आवाज पर नियंत्रण, भाव-भंगिमाएं, फ्रेम जागरूकता, स्क्रिप्ट ब्रेकडाउन, पूर्वाभ्यास रणनीति और शारीरिक तत्परता जैसे प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया।
डीएलसी सुपवा के ऑडियोग्राफी अध्यक्ष देबाशीष रॉय ने फिल्म निर्माण में ध्वनि और श्रव्य की मूल बातों पर एक सत्र आयोजित किया। उन्होंने सिनेमाई अनुभव को आकार देने में ध्वनि डिजाइन की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बताया।
बैकग्राउंड स्कोर विकसित करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। प्रत्येक टीम ने पिछले चार दिनों में अर्जित ज्ञान का उपयोग करते हुए परिसर में एक लघु फिल्म की शूटिंग की। कार्यशाला के अंतिम दिन समापन समारोह में इन फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।