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Rohtak News: ईशा अली मामले में जज ने पीजीआईएमएस थाने से मांगी 202 की जांच रिपोर्ट

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रोहतक। उत्तर प्रदेश के शामली निवासी ईशा अली की बेटी के ऑपरेशन में प्रयोग किए गए इम्प्लांट विवाद संबंधी 2018 का मामला पीजीआईएमएस में एक बार फिर सुर्खियों में है। रोहतक कोर्ट में जज मंगलेश चौबे ने इस संबंध में पीजीआईएमएस थाना प्रभारी से 202 की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसमें ईशा के वकील शिवराज मलिक की ओर से केस लड़ा जा रहा है।
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शिकायतकर्ता ईशा अली ने बताया कि उसकी बेटी 10 जनवरी 2018 को दाखिल हुई थी। 20 को ऑपरेशन हुआ और दो फरवरी को छुट्टी दे दी गई। बेटी का ऑपरेशन होना था, इसमें प्रयोग होने वाले इम्प्लांट की कीमत 45 हजार बताई।
40 हजार 500 मौके पर जमा कराए गए, लेकिन बाद में 30 हजार फिर मांगे। न देने पर विक्रेता और डॉक्टर ने धमकी दी। उसके धर्म पर भी सवाल उठाया गया। इस पर उसने सीएम विंडो, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महिलाा आयोग, उपायुक्त, पुलिस कप्तान, निदेशक पीजीआईएमएस को शिकायत दी। मजबूरी में उसने 14 मई को सैशन कोर्ट रोहतक गया और उपभोक्ता फोरम में भी अपील डाल दी। रुपये खर्च करने के बाद उसे मेरठ में उपचार करवाना पड़ा और बेटी भी अपाहिज हो गई।
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पहली 202 रिपोर्ट पर उठे हैं सवाल
सवाल उठाया गया है कि पुलिस ने पहली 202 की जांच रिपोर्ट सही नहीं बनाई। इसमें सभी तथ्य शामिल नहीं किया। 27 फरवरी को जज के सामने तथ्य रखे गए कि सप्लायर हाईकोर्ट में मानता है कि वह इम्प्लांट अंदर देता है, डॉक्टर भी मानता है कि वह मंगाते हैं, रजिस्ट्रार का हल्फनामा कि बाहर से इम्प्लांट लाना गलत है तो बचा क्या है। इस मामले की जांच गुरुग्राम के सेवानिवृत जांच अधिकारी आरके वर्मा व सेवानिवृत जज आरपी भसीन बतौर जांच अधिकारी अपनी रिपोर्ट दे चुके हैं। इसके अलावा संस्थान के तत्कालीन चीफ विजिलेंस अधिकारी नित्यानंद ने भी जांच रिपोर्ट में डॉक्टर व इम्प्लांट सप्लायर को गलत ठहराया है। इस पर निर्देश दिए गए हैं कि पुलिस अधिकारी स्वयं संबंधित तथ्यों पर अपनी रिपोर्ट दें।

ईसी में भी जाएगा मामला
जांच अधिकारी आरके वर्मा की जांच रिपोर्ट के आधार पर सीएम विंडो पर की गई शिकायत पर ईशा अली को जवाब मिला है कि संस्थान इस रिपोर्ट को ईसी में रखेगा। वहां इस मामले का और डॉक्टर के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। संस्थान की ओर से जवाब दिया गया है कि यह उनका प्रशासनिक निर्णय है। क्योंकि वह कोई भी कार्रवाई ईसी की बैठक में ही तय करते हैं। इसके लिए ईशा अली को पत्र भी दिया गया है कि संबंधितडॉक्टर का एजेंडा ईसी की बैठक में रखा जाएगा। यहां फैक्ट फाइंडिंग की जांच होगी।

वीआरएस के लिए कर दिया है आवेदन
काबिलेगौर है कि मामला ईसी में जाने से पहले और पुलिस के 202 के बयान लेने से पहले ही इस मामले में शामिल डॉक्टर ने वीआरएस के लिए आवेदन कर दिया है। यदि कोई विवाद नहीं हुआ तो वह स्वयं तीन माह बाद सेवानिवृत हो जाएंगे। वहीं मामला उलझता है तो पेंशन रूकने के साथ प्रशासनिक कार्रवाई होना तय है।

मुझे न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। कई साल से इंसाफ के लिए भटक रहा हूं। सीएम विंडो से मिली जानकारी से राहत मिली है।
- ईशा अली, शिकायतकर्ता

ईशा अली का केस मैं लड़ रहा हूं। कोर्ट ने पीजीआईएमएस थाना एसएचओ से 202 की रिपोर्ट दोबारा मांगी है। इसमें कहा गया है कि केस से जुड़े सभी तथ्यों को शामिल करना होगा। इसके लिए 20 अप्रैल 2023 की तिथि लगी है।
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- शिवराज मलिक, सीनियर अधिवक्ता

मैने ऑर्डर की कापी अभी नहीं पढ़ी है। इसे देख कर ही कुछ कह पाऊंगा।
- प्रमोद गौतम, पीजीआईएमएस थाना प्रभारी
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