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सम्मान भत्ते की उम्मीद में उमड़ी समाज कल्याण विभाग में बुजुर्गों की भीड़

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उम्र के आखिरी पड़ाव में सम्मान भत्ता पाने के लिए म्हारे बुजुर्ग धक्के खा रहे हैं। शुक्रवार को समाज कल्याण विभाग में 420 मिनट में दो डॉक्टरों की टीम ने 500 बुजुर्गों की आंख, दांत व आईब्रो देखकर तय किया कि उनकी उम्र 60 साल से ऊपर है या नहीं। एक तरह से औसतन 1 मिनट 19 सेकंड का समय डॉक्टरों ने एक बुजुर्ग की आयु जांचने में खर्च किया। ऐसे में जांच की गुणवत्ता का अनुमान लगाया जा सकता है।
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प्रदेश सरकार ने बुढ़ापा पेंशन यानि सम्मान भत्ते के लिए आयु 60 वर्ष तय की है। इसके लिए शैक्षणिक रिकार्ड में आयु प्रमाणित होनी चाहिए। अगर शैक्षणिक रिकार्ड नहीं है तो बड़े बेटे या बेटी की उम्र 41 साल या इससे ज्यादा है तो वह पेंशनपात्र माना जाएगा। इसके बावजूद अगर किसी आवेदक के बेटा या बेटी के पास भी शैक्षणिक रिकार्ड नहीं है तो उनका हर माह की 26 तारीख को समाज कल्याण विभाग सिविल अस्पताल के माध्यम से मेडिकल जांच कर आयु का पता लगा जाता है। शुक्रवार को समाज कल्याण विभाग में 500 बुजुर्गों को मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया। सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक दो डॉक्टरों ने बुजुर्गों की आयु की जांच पड़ताल की। अब उनकी रिपोर्ट के आधार पर समाज कल्याण विभाग सूची बनाकर चंडीगढ़ मुख्यालय भेजेगा। वहां से पात्र आवेदकों की सूची ऑनलाइन समाज कल्याण विभाग के पास आएगी।
बारिश में विभाग-सिविल अस्पताल के चक्कर काटते रहे बुजुर्ग
उम्र प्रमाणित कराने आए बुजुर्ग विभाग और सिविल अस्पताल के चक्कर काटते नजर आए। दरअसल जो बुजुर्ग सिविल अस्पताल से 5 रुपये का ओपीडी कार्ड नहीं बनवाकर लाए थे, उन्हें दोबारा अस्पताल में कार्ड बनवाने जाना पड़ा। इस दौरान हल्की बूंदाबांदी में बुजुर्ग फर्श पर बैठे दिखाई दिए। कुछ बुजुर्गों का जब टोकन की लाइन और भीड़ से गुजरने के बाद डॉक्टर के पास जाने का नंबर आता तो डॉक्टर बोलते बाबा अस्पताल से जाकर 5 रुपये का कार्ड तो ले आओ। यह सुनकर बुजुर्ग मायूस होकर बाहर आए और भीगते हुए अस्पताल से कार्ड लेने गए।
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टोकन के फेर में उलझे रहे बुजुर्ग
सुबह के 8 बजे से ही टोकन के लिए बुजुर्गों की लाइनें लग गई थी। लेकिन बुजुर्गों की भीड़ को देखते हुए कभी टोकन की लाइन को इस दरवाजे पर तो कभी उस दरवाजे पर शिफ्ट किया जा रहा था, इससे बुजुर्गों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। विभाग की तरफ से दिए जाने वाले टोकन 340 बुजुर्गों में ही बांटे गए, जबकि बुजुर्गों की संख्या 500 के करीब रही। ऐसे में बिना टोकन लिए हुए बुजुर्ग अपनी बारी का इंतजार करते रह गए।
न लाइनें बनीं, न मिली बैठने को जगह
समाज कल्याण विभाग में उम्र प्रमाणित कराने आए बुजुर्गों को अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा। बुजुर्गों के लिए न कोई बैठने की जगह थी और न ही महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग लाइनें थी। विभाग में 500 बुजुर्गों की उम्र की जांच के लिए सिर्फ दो ही डॉक्टर मौजूद रहे।
हर महीने 70 प्रतिशत बुजुर्गों की बनती है पेंशन
जांच के तीन दिन बाद डॉक्टरों की रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद उम्र प्रमाणित में पास हुए बुजुर्गों के दस्तावेजों को पेंशन के लिए साइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। हर महीने 70 प्रतिशत बुजुर्गों की पेंशन बन जाती है। विभाग के पास उम्र प्रमाणित करने को लेकर नई गाइडलाइन आई है। अब एसएलसी यानी स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट के आधार पर ही बुजुर्गों की उम्र को प्रमाणित किया जाएगा। जिन बुजुर्गों के पास खुद का एसएलसी नहीं है वो अपने बड़े बेटे या बेटी के एसएलसी को आधार बनाकर ला सकता है। एज वेरिफिकेशन के लिए एसएलसी अब मान्य होगा।
- कर्मवीर नैन, असिस्टेंट
डॉक्टर बोले-फिजिकल अपीयरेंस और एसएलसी से लगा रहे उम्र का अंदाजा
सिविल अस्पताल से बुजुर्गों की जांच के लिए आए बीडीएस डॉक्टर सुमित जुनेजा ने बताया कि फिजिकल अपीयरेंस और एसएलसी के आधार पर ही बुजुर्गों की उम्र का अंदाजा लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों के पास कोई उम्र का प्रमाण नहीं है और न ही किसी उपकरण से उनकी उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। दांत, आंखों और आइब्रो को देखकर ही उम्र का अंदाजा लगा रहे हैं।
बुजुर्गों की उम्र बताने में कन्फ्यूज्ड रहे डॉक्टर
समाज कल्याण विभाग में पेंशन के लिए उम्र प्रमाणित कराने आए बुजुर्गों की उम्र बताने में डॉक्टर कन्फ्यूज्ड रहे। दस्तावेजों में जहां बुजुर्गोें की उम्र 65 के पार नजर आई, वहीं डॉक्टर उनकी फिजिकल फिटनेस देखकर उम्र का सही अंदाजा नहीं लगा पाए। चिड़ी गांव के बुजुर्ग राममेहर की हेल्थ को देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। क्योंकि दस्तावेजों में ही उनके बड़े बेटे की उम्र 47 साल है। ऐसे में उनकी उम्र 60 के पार होना स्वाभाविक है। जब डॉक्टरों ने पूछा कि बाबा कितने साल के हो तो बुजुर्ग ने कहा 75 साल का हो चुका हूं भाई, इब तो पेंशन बनवा दोे। बुजुर्ग की ड्रेंसिंग सेंस से लेकर काले बालों और चुस्ती-फुर्ती को देखकर डॉक्टर उम्र का कोई सटीक अंदाजा नहीं लगा पाए और बेटे की उम्र के आधार पर बुजुर्ग की उम्र 62 साल करार कर दी गई।
ऐसे ही दूसरे वाक्या जिले के भगवतीपुर गांव की बुजुर्ग राजबाला के साथ हुआ। उनकी उम्र का सटीक अंदाजा भी डॉक्टर नहीं लगा पाए। राजबाला की बड़ी बेटी की उम्र 38 साल है और एसएलसी में उनकी उम्र 61 साल से ज्यादा है। डॉक्टरों ने फिजिकल अपीयरेंस, बेटी की उम्र और (एसएलसी) स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट के आधार पर ही उनकी उम्र 60 साल करार की। जब डॉक्टरों ने पूछा माई कितने साल की हो तो राजबाला ने बताया कि बेटा इब जन्म प्रमाण पत्र तो कड़ै तै लाऊं? 60 पार की तो हो ली हूं, स्कूल तै भी पर्चा बणवा लाई सूं और चक्कर मत कटवाओ इब तो बणवा दो बेटा पेंशन।
बुजुर्गों की समस्याएं
सुबह 8 बजे बिना कुछ खाए-पिए घर से निकला था। यहां आकर पता चला टोकन भी खत्म हो चुके हैं। एक बार धक्का-मुक्की करके अंदर गया तो डॉक्टर ने बोल दिया ताऊ अस्पताल से ओपीडी कार्ड ले आ। बारिश में जाकर कार्ड लेकर आया हूं, अब दोबारा पता नहीं कब नंबर आएगा।
- सूबेदार महेंद्र सिंह, गांव सीसर
सुबह 7 बजे घर से निकला था 9 बजे यहां पहुंचा। 1 घंटा लाइन में लगकर टोकन लिया था। बोलकर गए थे आराम से बैठ जाओ बारी-बारी टोकन वालों को बुलाएंगे। अभी तक इंतजार में बैठा हूं, मेरे बाद आए हुए थे जो उनका भी नंबर आ गया मुझे नहीं बुलाया। लाइन में खड़े होने की हिम्मत नहीं है अब।
- रामेसर, गांव किशनगढ़
पैरों में दर्द है लाइन में नहीं खड़ी हो सकती। टोकन लिया था पर कोई फायदा नहीं। बिना टोकन वाले भी अंदर जा रहे हैं। सुबह से भुखी प्यासी बैठी हुई हूं, पता नहीं कब नंबर आएगा।
- ओमपति, महम
एक्सपर्ट व्यू
एक्सपर्ट के अनुसार बुजुर्गों की आयु जांच यदि सामान्य रूप से होती है तो इसमें अधिक समय नहीं लगता। आयु के कागज सामने होते हैं तो डॉक्टर उन्हें देखकर व्यक्ति से मिलान करता है। यदि किसी केस में संदेह होता है तो उसकी जांच रिपोर्ट उसकी हिसाब से बनती है। ऐसे मामलों में रेडियोलॉजी विभाग की भी मदद ली जाती है। यह जांच प्रक्रिया लंबा समय लेती है। सामान्य रूप से बुजुर्गों की आयु जांच मामले में कुछ स्पेशलिस्ट बैठते हैं, जोकि कागज और व्यक्ति को देखकर उम्मीदवार की उम्र तय करते हैं।
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