जसिया गांव में चल रहे धरने में जाट समाज के लोगों ने आरक्षण को अपना हक बताया। मंच से उठी सामूहिक आवाज में यही गूंजा कि हक ल्यांगे पण भाईचारे से। धरनास्थल पर पूरे दिन आरक्षण से अधिक भाईचारे को बनाए रखने पर बल दिया गया। आंदोलन की कमान बुजुर्गों के हाथों में होने के चलते किसी को भी गलत टिप्पणी नहीं करने दी गई। वीरवार से धरना स्थल पर क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा, जिसमें पहले दिन 11 लोग बैठेंगे। इसके बाद भी यदि कोई निर्णय नहीं लिया गया तो भूख हड़ताल की जाएगी।
रोहतक-पानीपत हाईवे स्थित जसिया गांव में चल रहा जाट समाज का धरना बुधवार को पूरे दिन शांतिपूर्ण रहा। हालांकि, पुलिस और आरपीएफ के जवान पूरे दिन स्थिति पर नजर रखे रहे। प्रशासनिक अधिकारी पेड़ों की छांव में तंबू गाड़कर आवश्यक दिशा-निर्देश देते दिखाई दिए। अखिल भारतीय आरक्षण संघर्ष समिति हरियाणा के उपाध्यक्ष मूलचंद दहिया, मेहर सिंह, बलवान सिंह, शीशपाल प्रधान, सूबेदार रघुवीर सिंह, हरीसिंह, धर्मवीर दांगी, टोनी आदि ने विचार रखे।
प्रशासन नहीं, शासन दे मंजूरी
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष अशोक बल्हारा ने कहा कि हम प्रशासन से नहीं, बल्कि शासन से बात करेंगे। शासन हमारी मांगों को मंजूरी दे तो हम अभी धरना समाप्त कर देंगे। प्रशासन अगर हमसे बातचीत करता है तो कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मुख्य बात शासन की है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारी अपने आपको सरकार और जनता के बीच की कड़ी बताते हुए आपसी संदेश पहुंचाने की बात कह रहे हैं। धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि प्रशासन हमें अरबन एरिया में धरने की कह रहा है, लेकिन यही जगह हमारे लिए सटीक है। चारों ओर हमारी बिरादरी के मकान हैं। सभी लोग एक-दूसरे को जानते हैं, अगर कोई भी व्यक्ति माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता है तो उसे तुरंत रोका जा सकता है। इसीलिए हमने यह स्थान चुना है।
डीआईजी आए और निर्देश देकर चले गए
धरने के चौथे दिन बुधवार को ऑक्स (ऑपरेशन ड्यूटी) डीआईजी महेंद्र सिंह मौके पर पहुुंचे, उन्होंने प्रशासनिक और आरएएफ अधिकारियों से बातचीत की। कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और चलते बने। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने यही कहा कि केंद्र से आरक्षण को लेकर प्रदेशभर में 55 टुकड़ियां बुलाई गई हैं। सभी अपना काम अच्छी तरह से कर रही हैं।
जब बनी असहज स्थिति
धरने में एक बार असहज स्थिति बन गई। धरना स्थल पर एक जगह महिलाएं और युवतियां बैठी थी। धीरे-धीरे महिलाएं जाने लगी। तभी एक युवती मुंह पर कपड़ा ढके काफी देर तक बैठी रही। थोड़ी देर बाद जब वह उठी तो वहां मौजूद लोगों को उस पर शक हुआ। पूछताछ में वह घबरा गई। लोगों का आरोप था कि उसने उनका भाषण रिकॉड किया है। काफी देर तक आरोपों की स्थिति बनी रही। बाद में युवती ने कहा कि उसने कुछ रिकॉर्ड नहीं किया। अगर लोग चाहें तो उसका मोबाइल ले सकते हैं। तभी समाज के बड़े-बुजुर्ग पहुंचे। समझाने के बाद युवती अपनी गुड़गांव नंबर की गाड़ी से चली गई। काफी देर तक उसकी गुप्तचर एजेंसी की सदस्य होने की चर्चा चलती रही।
सरकार तक पहुंचा देंगे संदेश
अभी तक धरना शांतिपूर्ण चल रहा है। किसी तरह की दिक्कत नहीं है। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह चौकस है। हम सरकार के नुमाइंदे हैं। धरना में शामिल लोगों के संदेश सरकार तक पहुंचा दिए जाएंगे।
- डॉ. मुनीष नागपाल, एसडीएम, रोहतक