गोद में चार साल का बच्चा और आंखों में आंसू। बेबस संध्या में पास कुछ बचा है तो बस यही। सिर छिपाने के लिए छत तक नहीं है। रविवार रात जिस मकान में महिला पूरे अधिकार के साथ रहती थी। सोमवार को उसी के बाहर बैठी यह बेबस मां देर रात तक रोती रही। इसकी न पुलिस ने सुनी न किसी अन्य ने। घर पर भी कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया।
मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बलरामपुर हाल एकता कॉलोनी निवसी संध्या ने बताया कि सुबह वह काम पर गई थी। दोपहर को लौटी तो घर खाली था। यहां न तो कोई सामान नजर आया और न ही सास-ससुर। पति 15 दिन पहले घर छोड़ कर चला गया। अब सास-ससुर बिस्तर, बर्तन सब समेट कर गायब हो गए। मकान तक नहीं रहा। कुछ लोगों ने अपने ही मकान से मुझे बाहर निकाल कर अपना कब्जा कर लिया। पुलिस के पास गई तो महिला पुलिस कर्मी ने मकान पर कब्जा करने वालों का ही पक्ष लिया। सुनवाई नहीं हुई तो हार कर एसपी से मिलने गए। यहां भी साहब ने कहा, अपनी अर्जी दे दो। इसके बाद भी थाने से मैडम का फोन आया कि पांच बजे तक मकान खाली चाहिए।
संध्या ने बताया कि वह पांच साल पहले एकता कॉलोनी निवासी दीपक के साथ शादी होने पर यूपी से यहां आई थी। उसका चार साल का बेटा भी है। पति 15 दिन पहले किसी बात को लेकर विवाद होने पर घर छोड़ कर चला गया। सुबह से थाने के चक्कर लगा रही हूं। कोई समाधान नहीं निकल रहा है।
महिला के परिजन मकान बेचकर चले गए हैं। महिला को रहने की जगह नहीं मिली है। इसलिए मकान खरीदने वाले से बात कर उसे वहीं कमरा दिलवा दिया गया है।
-राकेश सैनी, प्रभारी, शिवाजी कॉलोनी।