रोहतक। अब कुत्ते व अन्य जानवरों के काटने पर मरीजों को शहर के नागरिक अस्पताल में ही इम्यूनोग्लोबिन मिलेगा। इससे पहले इम्यूनोग्लोबिन के मरीजों को पीजीआई रेफर कर दिया जाता था। अब मरीजों को पीजीआई जाने से राहत मिलेगी।
पहले एक महीने में चार मरीज पीजीआई रेफर करने पड़ते थे। डॉ. दिनेश मलिक ने बताया कि इम्यूनोग्लोबिन का उपयोग गंभीर मामलों में किया जाता है। पहले यहां यह सुविधा नहीं थी।
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पहले चरण में नागरिक अस्पताल में 25 इम्यूनोग्लोबिन डोज पहुंची हैं। इससे पहले रेबीज के मरीजों का केवल एआरवी से इलाज किया जाता था। अस्पताल में एआरवी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है लेकिन इम्यूनोग्लोबिन मरीजों को महंगा पड़ता है। इसकी एक डोज लगभग 6000 रुपये की पड़ती है।
गहरे घावों को देखते हुए मरीज को दिया जाता है इम्यूनोग्लोबिन
इसके विपरीत एंटी रेबीज टीका बाजार में अधिकतम 500 रुपये तक में मिल जाता है। सरकारी अस्पताल में तो यह 100 रुपये में लगता है। जानवर के काटने के बाद गहरे घावों को देखते हुए मरीज को इम्यूनोग्लोबिन दिया जाता है। यह मरीज को स्वस्थ होने में सहायता प्रदान करता है। इस वैक्सीन के लगने से शरीर में एंटीबॉडी तेजी से बनेगी और रेबीज फैलने का खतरा समाप्त हो जाएगा।