रोहतक में मचे कोहराम में पूरा तंत्र फेल हो गया। इसकी पहली गाज आईजी श्रीकांत जाधव पर गिरी और उनका तबादला मधुबन कर दिया गया। रोहतक में उपद्रव की शुरुआत हुई तो पूरा प्रदेश जल उठा। हाहाकार के दौरान मैदान भागकर छोड़ जाने के आरोप को उन्होंने गलत बताया। उन्होंने कहा कि मैं भागा या डटा रहा, यह तो सीसीटीवी फुटेज बता देंगे।
रोहतक में लूट खसोट आगजनी, आपने सामने की झड़पों को रोकने में नाकाम रही पुलिस का ठीकरा आईजी के सिर फुटा है। आईजी से पूछा गया कि आप पर आरोप लग रहे हैं कि आप स्थिति को नहीं संभाल पाए? इस पर उन्होंने कहा कि जिले में कार्रवाई का अधिकार एसपी को होता है।
आईजी सिर्फ सलाह दे सकता है। मैं मैदान छोड़ कर भागा था या मैदान में डटा हुआ था यह सीसीटीवी फुटेज बता देंगे। जो भी कार्रवाई हुई मैं खड़ा रहा। यह बात आईजी ऑफिस में उस वक्त मौजूद अधिकारी बता देंगे कि मैंने क्या किया? हालांकि आईजी ने अपने तबादले को रूटीन बताया है।