रोहतक। नशे के आदी लोग दवा पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे रोगियों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता शून्य होने लगती है। ऐसे मरीजों का बिना दवा एक्यूप्रेशर से इलाज संभव है। रोहतक स्थित एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ भारत भूषण भुटानी ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि नशा ऐसी बीमारी है, जिसमें पहले तो रोगी चिड़चिड़ा होने लगता है, उसकी चेतना शक्ति शून्य होने लगती है। नशे के आदी लोगों के शरीर में विटामिन ए, बी, सी, डी सहित जरूरी पदार्थों की कमी हो जाती है, क्योंकि नशे में विटामिन तो होता नहीं है, बल्कि शरीर में जो विटामिन होता है, नशा उसे भी कम देता है। ऐसे रोगी चेतना शक्ति बढ़ाएं और डाइट बदलें तो नशा उनसे दूर भागेगा। एक्यूप्रेशर में कई विधियां हैं, जो नशे के रोगी की स्थित के अनुसार प्रयोग में लाई जाती हैं। रोगी के शरीर की गर्मी को कम किया जाता है और उसकी चेतना शक्ति को ठीक किया जाता है, जिससे रोगी धीरे-धीरे नशे से दूरी बनाने लगता है। ऐसे रोगियों का इलाज कलर, सीड व मैग्नेट पद्धति से किया जाता है। इस इलाज की खास बात यह है कि इसमें दवा का कोई प्रयोग नहीं होता है। रोगी की इच्छाशक्ति जितनी मजबूत होती जाएगी, नशे से वो उतनी ही जल्दी बाहर आता जाएगा। कलर पद्धति इसमें काफी मदद करती है।
डाइट में यह शामिल करें : सोयाबीन, मूंग, राजमा, काली बींस, तरबूज, स्ट्राबेरी, रसबेरी, चेरी, शहतूत, मिलेट, कद्दू के बीज, अखरोट।