रोहतक। धर्म नहीं कर सकते तो अधर्म भी मत करो। दान कर नहीं सकते तो लेना भी नहीं चाहिए। एक हाथ से लेते हैं तो दूसरे हाथ से दान करना भी चाहिए। यह कहना है कथा वाचक पवन भारद्वाज का। वह बुधवार को गांधी नगर स्थित श्रीराम नीलकंठ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं को प्रवचन दे रहे थे।
कथा वाचक ने कहा कि आदान-प्रदान प्रकृति का नियम है। यह दोनों ओर से होता है। आदान-प्रदान नहीं होगा तो व्यवस्था रुक जाएगी। दान तो दान है। दान खुलकर व निस्वार्थ भाव से करना चाहिए। भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रीहरि के भजन प्रस्तुत किए।
इन पर श्रद्धालु झूम उठे। उन्होंने श्रद्धालुओं को श्रीराम चरित्र व श्रीकृष्ण जन्म व बामन अवतार के प्रसंग सुनाते हुए उनके जीवन से सीख लेने का संदेश दिया।