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लॉकडाउन तोड़ा तो 6 माह, गलत दावा किया तो 2 साल तक कैद संभव

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28सीटीवाई04वीकेपी : एडवोकेट डा. दीपक भारद्वाज। - फोटो : RohtakCity
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रोहतक। कोविड-19 से बने खतरे को देखते हुए पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के अंतर्गत बने कानून को पूरे भारत में लागू किया गया है। यह कहना है एडवोकेट डॉक्टर दीपक भारद्वाज अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया एवं पूर्व सचिव जिला बार एसोसिएशन, रोहतक का। उनका कहना है कि डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़े कानून के पहलू पर नजर डालें तो यह कानून साल 2005 में अमल में लाया गया था, कोरोना के खतरे के कारण 21 दिन के लॉकडाउन को देखते हुए भारत सरकार द्वारा लोगों की जान की सुरक्षा करने हेतु डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी हुई गाइडलाइन और उसमें मौजूद प्रावधान को देखते हुए साथ ही आईपीसी की सेक्शन भी आम नागरिक पर लागू की गई है। यदि हम ध्यान दें तो जिन आदेशों के अंतर्गत आम नागरिक को घर से बाहर न निकलने के आदेश दिए गए हैं और घर में ही रह कर अपनी और अन्य लोगों की सुरक्षा करने के लिए कहा गया है। ऐसे में डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़े कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को सजा एवं जुर्माने का प्रावधान डिजास्टर मैनेजमेंट की धारा 51 से 60 में दी गई है। इसमें धारा 51 में सरकारी काम में बाधा डालना इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति आपदा के दौरान सरकारी आदेशों की पालना न करें और किसी काम में बाधा पैदा करें तो उसे 2 साल तक की सजा का प्रावधान है, वहीं यदि अगर हम धारा 52 जिसके अंतर्गत गलत दावा करना यानी यदि कोई व्यक्ति गलत दावा करके सरकार से किसी तरह का आपदा लाभ राहत मदद वगैरह लेता है और वह झूठा साबित होता है तो ऐसे में इस धारा के अंतर्गत 2 साल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। धारा 53 के अंतर्गत पैसा या सामान का गबन ऐसे व्यक्ति जो आपदा के समय लोगों के लिए मुहैया कराए गए पैसे या सामान में हेराफेरी करते हैं या उसका गबन करते हैं तो इस धारा के अंतर्गत भी 2 साल की सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। वही धारा 54 के अंतर्गत झूठी सूचना देना यदि कोई व्यक्ति इस दौरान झूठी खबर फेक न्यूज बेबुनियाद बातें फैलाएं, जिससे लोग पैनिक हो तो ऐसे में इस धारा के अंतर्गत एक साल की सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। वहीं धारा 55 के अनुसार सरकारी विभाग विभागों में जुर्म यानी सरकार के किसी विभाग द्वारा कोई जुर्म सामने आता है तो उसके प्रमुख की जवाबदेही मानी जाएगी यदि किसी कर्मचारी की गलती है तो वह डिपार्टमेंट हेड की जानकारी में न हो तो ही वह बच पाएगा ऐसी सूरत में जांच में यदि कसूरवार पाया जाता है तो उस पर भी कार्रवाई होनी निश्चित है। धारा 56 कहती है कि सरकारी अधिकार अधिकारी की नाकामी और जुर्म यानी ऐसा कोई अधिकारी जिसकी आपदा के समय में दी गई जिम्मेदारी से भागे या बिना इजाजत के उसे पुराना करें तो ऐसे में 1 साल की सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। वही धारा 57 सेवा नहीं देने का जुर्म यानी सरकारी आदेश पर कोई सेवा ना देने का केस होता है तो ऐसे में एक साल की जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। वहीं धारा 58 कंपनियों के जुर्म आपदा के तहत बनाए गए नियमों की अनदेखी और उनका उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। धारा 59 मुकदमे की पूर्व मंजूरी यानी धारा 55 और 56 सरकारी विभागों और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने से पहले सरकार से इजाजत लेनी होगी। इसी के साथ धारा 60 में जुर्म का संज्ञान इस धारा में साफ किया गया है कि कोई कोर्ट डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत दर्ज केसों का संज्ञान तभी लेगी जब वह मुकदमा सरकार या प्रशासन के द्वारा दर्ज कराया गया होगा। वहीं इंडियन पीनल कोड की धारा 188 में सरकारी अधिकारी के आदेश की अवहेलना के अंतर्गत भी एक महीने से लेकर 6 महीने तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इन धाराओं पर और डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़े कानून पर नजर दौड़ाई तो ऐसा भारत में पहली बार हुआ है, जब इस कानून को अमल में लाया गया है।
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