हर साल पंजाब और हरियाणा में धान की कटाई के बाद दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण भयानक स्थिति में पहुंच जाता है। लेकिन इस बार कोरोना भी है, ऐसे में पराली जलने पर कोरोना कहर बरपा सकता है। इसे देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने अभी से कमर कस ली है। हरियाणा की मुख्य सचिव की ओर से उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी हालत में पराली जलने की घटनाएं रोकें। हालांकि हर साल कृषि विभाग किसानों को जागरूक भी करता है और कार्रवाई भी करता है। लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी बदली हुई है। कोरोना के चलते कार्रवाई की गुंजाइश नहीं है। सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी हाल में जिले में पराली नहीं जलनी चाहिए। चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े। डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने कृषि विभाग को इस बारे में हिदायत दी है। विभाग ने दो बिंदुओं पर रणनीति तैयार कर काम शुरू कर दिया है। एक तरफ कैंप लगाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि कोरोना के चलते पराली जलाना उनके और परिजनों के लिए जानलेवा हो सकता है। दूसरी तरफ पराली प्रबंधन की मशीनरी पर अनुदान दिया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा किसानों को मशीनरी खरीदने को प्रेरित किया जा रहा है। जिले में धान की कटाई 10 अक्तूबर से शुरू होने की उम्मीद है।
इस सीजन में स्थापित किए जाएंगे 16 कस्टम हायरिंग सेंटर
जिले में अभी 66 कस्टम हायरिंग सेंटर हैं, जिनके पास पराली प्रबंधन के 1177 कृषि यंत्र हैं। खरीफ सीजन 2020 में 16 नए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इस सीजन में 758 कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों से 21 अगस्त 2020 तक ऑनलाइन आवेदन लिए जा चुके हैं। इसके लिए उन्हीं किसानों को चुना जाएगा, जिन्होंने पिछले दो सालों में अनुदान का लाभ न लिया हो। उनके पास अपने नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर, अपने, माता-पिता या भाई-बहन के नाम पर खेती योग्य जमीन हो। उन किसानों को हिदायत दी गई है कि वे सरकार द्वारा अधिकृत विक्रेता से कृषि यंत्र खरीदें। उसका बिल, अपना घोषणा पत्र और मशीन के साथ फोटो 30 सितंबर 2020 तक विभाग के पोर्टल पर अपलोड करें। अपलोड किए सभी दस्तावेज, पटवारी की रिपोर्ट और मेरी फसल मेरा ब्योरा का रजिस्ट्रेशन सहायक कृषि अभियंता के कार्यालय में जमा करवाएं।
119 जागरूकता कैंप लगाए गए
कृषि विभाग ने किसानों को कोरोना काल में पराली जलाने के नुकसान के बारे में जागरूक करने के लिए जिले भर में 119 कैंप लगाए हैं। इनमें दो हजार से ज्यादा किसानों को जागरूक किया गया है। कैंप लगाने का सिलसिला अभी जारी है। इसके अलावा 100 स्थानों पर वॉल पेंटिंग भी करवाई गई है। खंड स्तर पर भी कैंप लगाए जाएंगे।
कोरोना को लेकर विभाग सतर्कता बरत रहा है। किसानों को पराली जलाने से रोकने को हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। लगातार कैंप लगाकर इसके नुकसान के बारे में जागरूक किया जा रहा है। पराली प्रबंधन की मशीनरी पर अनुदान देकर वह खरीदने को प्रेरित किया जा रहा है।
- डॉ. रोहताश सिंह, उप निदेशक कृषि।