रोहतक। पीजीआईएमएस में लगातार कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन यहां सीनियर डॉक्टर स्वयं ड्यूटी करने की बजाय एक-दूसरे विभागों पर जिम्मेदारी डालकर बच रहे हैं। सबसे अधिक ग्राउंड ड्यूटी जूनियर डॉक्टरों की लगाई जा रही है। मरीज सवाल उठाने लगे हैं कि यदि मरीज के पास डॉक्टर नहीं आएगा तो उपचार कैसे होगा। हालांकि आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टर उपचार कर रहे हैं, लेकिन वार्डों में मरीजों को देखने कोई डॉक्टर नहीं जाता।
मंगलवार को एक गर्भवती महिला ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। महिला को रक्त की कमी थी और सांस लेने में भी समस्या हो रही थी। सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर सीजेरियन करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन वह नहीं बच पाई।
विभाग में बायोकेमिस्ट्री के डॉक्टरों की ड्यूटी थी, यहां न तो गाइनी का कोई डॉक्टर था और न ही मेडिसिन विभाग का। वहीं परिजनों का आरोप है कि महिला की सुनवाई कई घंटे किसी ने नहीं की। पहली डिलिवरी का दर्द भी क्या डॉक्टरों को सुनाई नहीं दिया। गौरतलब है कि कोरोना को लेकर संस्थान में शुरुआत से ही खींचतान चली आ रही है। संक्रमणकाल में सबसे अधिक जिम्मेदारी मेडिसिन, चेस्ट एंड टीबी, पीसीसीएम विभाग की होनी चाहिए। लेकिन यहां शुरुआत से एनेस्थीसिया विभाग को आगे किया जा रहा है। जबकि इस विभाग की जिम्मेदारी आईसीयू चलाने की होती है। सर्जरी, ऑर्थो विभाग ने पहले ही आपात विभाग के नाम पर हाथ खड़े कर रखे हैं। स्थिति यह है कि अप्रैन दिखाने के लिए प्रशासन नॉन क्लीनिकल विभाग को आगे कर रहा है। दावा किया जा रहा है कि महिला को जब प्रसव पीड़ा शुरू हुआ तो एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, लेकिन इससे पहले महिला ने दम तोड़ दिया। हैरानी की बात यह है कि वार्ड 24 से लेबर रूम व ऑपरेशन थियेटर स्ट्रेचर पर अधिकतम दस मिनट में पहुंचाया जा सकता है। इससे पहले भी एक महिला को स्पेशल कोरिडोर बनाकर ले जाया गया था।
केस एक
प्रसव पीड़ा से कराहती रही महिला पर किसी ने नहीं सुनी
सोनीपत के भैंसवाल निवासी सुरेंद्र ने पीजीआईएमएस के डॉक्टरों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी पुत्रवधू मंगलवार को सुबह सात बजे से दोपहर तक फोन करती रही कि उसे प्रसव पीड़ा हो रही है, लेकिन कोई देखने नहीं आ रहा है। वह कमरे में अकेली थी और दर्द से कराहती रही। वह कोरोना पॉजिटिव थी। उसके संक्रमित होने पर हमारे परिवार का भी खानपुर में सैंपल हुआ था और घर पर हमें अंदर रहने को कहा गया था। पुत्रवधू की पीड़ा सुनकर हमने पीजीआईएमएस जाने की तैयार की तो पुलिस ने नहीं जाने दिया और कार्रवाई की चेतावनी दी। पीजीआईएमएस में मरीज को किसी ने नहीं देखा और यहां हमें किसी ने नहीं निकलने दिया। हमारी पुत्रवधू फोन करती रही और बचाने की गुहार लगाती रही, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की और अंत में उसने दम तोड़ दिया। अब डॉक्टर कह रहे हैं कि उसने कोरोना से दम तोड़ दिया। लेकिन डॉक्टर यह बात बता सकते हैं कि जच्चा को कोरोना था, लेकिन उन्होंने बच्चे को बचाने का क्या प्रयास किया। इसकी शिकायत वह मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री से करेंगे। वह ग्राम पंचायत में सफाई कर्मचारी है तो क्या उसके परिवार को उपचार नहीं दिया जाएगा। सरकार उसके फोन की और मरीज के फोन की जांच करवा सकती है कि पीड़िता ने कितने फोन किए हैं।
केस दो
हमने लगाई ऑक्सीजन, यहां सुनने वाला कोई नहीं
संस्थान में उपचाराधीन एक कोरोना संक्रमित मरीज ने बताया कि दो सप्ताह से वह दाखिल है। यहां नर्स तो आती है, लेकिन डॉक्टर दिखाई नहीं देते। कई बार तो जब कोई मरीज चीख रहा होता है तो एक-दूसरे की जाकर मदद करते हैं। मरीज ने बताया कि एक रात को एक साथी की तबीयत अधिक खराब हो गई, उसे सांस लेने में समस्या हो रही थी। इस पर जाकर हमने ऑक्सीजन चालू की, लेकिन मौके पर कोई नहीं आया। यदि यहां नर्स व बीययर को ही उपचार करना है तो डॉक्टर कोरोना वॉरियर क्यों बन रहे हैं। कोरोना का अटैक सबसे अधिक फेफड़े पर होता है, यहां स्टैथो से किसी मरीज को नहीं देखा जाता। पीपीई किट का क्या लाभ है, जब मरीज को कोई डॉक्टर देखने ही नहीं आता। यदि नर्सों को उपचार करना आता तो डॉक्टरों की क्या जरूरत है।
केस तीन
डॉक्टर दिखाई ही नहीं देते, सिर्फ निगेटिव रिपोर्ट का करते हैं इंतजार
संस्थान में उपचाराधीन एक अन्य मरीज ने बताया कि नर्स व बीयरर को छोड़कर यहां कोई डॉक्टर दिखाई नहीं देता। जूनियर डॉक्टर यहां नहीं आते, सीनियर डॉक्टरों का राउंड तो दूर की बात है। नर्स ही पूछती है कि कोई समस्या तो नहीं है। यदि समस्या बताई जाती है तो नर्स दवा दे देती है, किसी डॉक्टर के जांच करने का कोई मतलब ही नहीं है। यहां बैठक कर हम सिर्फ अपनी जांच रिपोर्ट के निगेटिव आने का इंतजार कर रहे हैं।
संस्थान में जिस महिला की मौत हुई है, उसका एचबी महज तीन था। उसे दो यूनिट रक्त दिया गया। मंगलवार सुबह नौ बजे, 11 बजे फोन पर बात की गई उसे दर्द नहीं था। 12:50 पर जब उसे दर्द शुरू हुए तो हमारी डॉक्टर वहां पहुंच गई थी। उसे हार्ट ओवरलोडिंग, रक्त की कमी, बीपी अधिक व कोरोना का संक्रमण था। मरीज की जरूरत के हिसाब से ऑपरेशन थियेटर तैयार करके उसका सीजेरियन करने की तैयारी थी, लेकिन इसी बीच उसने दम तोड़ दिया। इसमें डॉक्टर की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई। इस मामले में परिजनों की ओर से हंगामे की कोई जानकारी नहीं है।
-डॉ. वंदना, नोडल अधिकारी स्त्री रोग विभाग, पीजीआईएमएस रोहतक।
पीजीआईएमएस के कोविड वार्ड में दाखिल मरीजों की जांच डॉक्टर करते हैं व राउंड भी करते हैं। पीपीई किट में राउंड किया जाता है, इसलिए मरीज पहचान नहीं पाते होंगे। किट में स्टैथो से जांच कर पाना संभव नहीं होता, इसलिए पल्स ओक्सीमीटर से उसकी जांच की जाती है। यदि डॉक्टर राउंड पर नहीं जाते तो इस संबंध में बात करेंगे और डॉक्टरों को ध्यान रखने को कहा जाएगा। हमारे कई विभाग के डॉक्टर कोरोना के मरीजों के लिए काम कर रहे हैं।
-डॉ. वरुण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआईएमएस रोहतक।
मंगलवार को एक दिन में तीन मौत
68 साल की महिला नांगलोई दिल्ली।
21 साल की महिला सोनीपत भैसरू कलां।
51 साल की महिला गुरुग्राम।