विजेंद्र कौशिक
रोहतक। पति-पत्नी एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं दे रहे हैं। अकेलेपन से दोनों के बीच ज्यादा तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में डॉक्टर एक-दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की सलाह दे रहे हैं। वहीं, परिवार में माता-पिता और बच्चों के बीच के रिश्तों में तनाव की स्थिति सिरदर्द बढ़ा रही है। बच्चे व किशोर तक अकेलेपन से चिड़चिड़े हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, एक साल में सिविल अस्पताल की ओपीडी में मनोवैज्ञानिक के पास 4500 के करीब मरीज काउंसिलिंग के लिए आए हैं। इनमें से 50 प्रतिशत मरीज सिरदर्द से परेशान हैं। रोजाना 13 नए केस ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें आधे मामले सिरदर्द के शामिल हैं।
सिविल अस्पताल के मनोवैज्ञानिक डॉ. विपिन नैन का कहना है कि सिरदर्द की एक वजह नहीं है। नींद पूरी न होने, खाली पेट रहने, लगातार स्क्रीन के आगे बैठने या मोबाइल फोन चलाने से भी सिरदर्द हो सकता है लेकिन सबसे बड़ी वजह तनाव है। सिरदर्द के मामलों में 70 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
डॉ. नैन का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह पति व पत्नी का एक-दूसरे को पर्याप्त समय न देना और संवाद का अभाव है। महिलाएं बच्चों को लेकर पुरुषों से ज्यादा चिंतित रहती हैं। उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य व कॅरिअर को लेकर परेशान रहती हैं।
.........
केस-1 : घर में अकेली पत्नी को होने लगी घबराहट
सोमवार को अस्पताल पहुंची एक महिला ने डॉक्टर को बताया कि उनकी सास-ससुर से नहीं बनती थी इसलिए वह उनसे अलग हो गई। पति रोज ड्यूटी पर चले जाते हैं। वह घर पर अकेली रहती है। तीन माह बाद उसे सिर दर्द के साथ घबराहट होने लगी। धड़कनें भी बढ़ गईं। पति के पास भी समय नहीं है।
...
केस-2 : सुबह पत्नी नहीं बनाती खाना, खाली पेट जाते हैं ऑफिस
काउंसिलिंग के दौरान बैंक क्लर्क बोले-तीन साल से वे सिरदर्द से परेशान हूं क्योंकि सुबह पत्नी खाना नहीं बनाती। खाली पेट ही काम पर जाना पड़ता है। डॉक्टर ने बताया कि एक तो काम का तनाव, ऊपर से खाली पेट रहने से दिक्कत बढ़ जाती है। इससे माइग्रेन तक हो सकता है।
....
केस-3 : मेड ने डाली मोबाइल फोन की लत, बेटा नहीं बोल रहा
एक डॉक्टर दंपती दो साल के बेटे को लेकर सिविल अस्पताल आया। बोला-उनका बेटा बोल नहीं पा रहा है। न ही कोई हरकत करता है। मोबाइल फोन देखते-देखते दूध पीने की आदत हाे गई है। जब मनोवैज्ञानिक ने पूछा तो बताया कि पति व पत्नी डॉक्टर हैं। दोनों ड्यूटी पर चले जाते हैं। बच्चे को मेड संभालती है। उसने बच्चे को मोबाइल फोन देखने की लत लगा दी। सलाह दी गई कि वे मेड को हटाकर खुद बच्चे का पालन-पोषण करें। ऐसे हालात में दादा-दादी की भी कमी महसूस होती है।
वर्जन
रोज ओपीडी में औसतन 13 से ज्यादा नए केस आ रहे हैं। इसमें सिरदर्द से परेशान लोगों की संख्या 50 प्रतिशत से ज्यादा है। इसमें भी 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। समय के अभाव में महिलाएं तनावग्रस्त व चिड़चिड़ी हो रही हैं। पति को चाहिए कि रिश्तों में समायोजन स्थापित करें। उनके पास हर माह 400 के करीब मरीज आ रहे हैं।
डॉ. विपिन नैन, मनोवैज्ञानिक सिविल अस्पताल रोहतक