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Rohtak News: कलानौर जिंदरान में सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न, मानसून बीता, अब भी चार फीट पानी

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कलानौर व जिंदरान के खेतों में जलभराव।
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कमलजीत सिंह
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कलानौर। कलानौर क्षेत्र व जिंदरान गांव में सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि में पिछले कई महीनों से जलभराव है। हैरानी की बात यह है कि मानसून समाप्त हुए काफी समय बीत चुका है लेकिन खेतों में आज भी करीब चार फीट तक पानी भरा हुआ है।
किसान न केवल खरीफ और रबी की फसल गंवा चुके हैं बल्कि आगामी फसल की बुआई की भी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। किसानों का कहना है कि इस पूरे संकट की मुख्य वजह संबंधित विभागों की घोर लापरवाही है।
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बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। खेतों से पानी निकालने के लिए न तो स्थायी समाधान किया गया और न ही कोई वैकल्पिक इंतजाम।
स्थिति इतनी खराब है कि कई किसानों ने 20 से 25 एकड़ भूमि 25 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके पर ली थी। फसल न होने के कारण वे किसान आज कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक किसी भी किसान को मुआवजा राशि नहीं दी गई है जिससे किसानों में भारी रोष व्याप्त है।
दूसरी ओर, बिजली विभाग की ओर से क्षेत्र में लगाए गए लगभग 150 अस्थायी बिजली मीटर भी समस्या बने हुए हैं। किसानों का आरोप है कि ये मीटर लगातार चोरी का शिकार हो रहे हैं।
गुरुवार देर रात दूसरी चोरी की घटना सामने आई जिसमें पांच एकड़ क्षेत्र में बिछी बिजली के तार अज्ञात चोर काटकर ले गए। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सिंचाई व अन्य कार्यों में भी परेशानी हो रही है।
पीड़ित किसान बिल्लू, अमित, संजय, लीला, नरेश, राजेंद्र, महेंद्र, अनिल चावला, शतीश जुनेजा और काला राठी सहित अन्य किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, बिजली चोरी पर रोक लगाई जाए और फसल नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। संवाद
किसानों का दर्द...जलभराव ने और कर्जदार बना दिया

मैंने 12 एकड़ जमीन 25 हजार रुपये ठेके पर ले रखी है। कपास की खेती की थी। मानसून में जलभराव हो गया। खड़ी फसल बर्बाद हो गई। अब गेहूं की बिजाई नहीं हो सकी, पानी अभी भी खेत में खड़ा है। यही हालात रहे तो आगामी फसल की बुआई भी नहीं होगी। -रजनेश राठी, किसान

15 एकड़ भूमि 25 हजार रुपये प्रति ठेके पर ले रखी है। खेतों में पानी भरा हुआ है। 2 फसलों से वंचित रह गए। आगे भी सुधार के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। किसान की पहले ही आमदनी कम थी, ऊपर से जलभराव ने और कर्जदार बना दिया। -अमित कुमार किसान

जमीन ठेके पर लेकर ही खेती करते आए हैं लेकिन इस बार जलभराव ने किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा। विभाग की तरफ से मुआवजा है न जलभराव से राहत है। किसान का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। सभी मौका मुआयना करके पल्ला झाड़ रहे हैं।
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-संजय, किसान
वर्जन

खेतों की जल निकासी के लिए ड्रेन तक खुदाई करवाई गई थी। दो गुटों की आपसी सहमति नहीं बनने से बीच में कार्य बंद हो गया। इसके बाद पाइपलाइन बिछाई गई। काफी मात्रा में जल निकासी हो चुकी है। चोरी की वारदातों के लिए डीएसपी से संपर्क कर गश्त बढ़ाने की मांग की जाएगी। जिन्होंने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण कराया था उन सभी को मुआवजे मिल चुका है। -आशीष कुमार, एसडीएम

कलानौर व जिंदरान के खेतों में जलभराव।

कलानौर व जिंदरान के खेतों में जलभराव।

कलानौर व जिंदरान के खेतों में जलभराव।

कलानौर व जिंदरान के खेतों में जलभराव।

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