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Rohtak News: सर्वेक्षण में कैसे मिले नंबर, जब आधे शहर से नजरें फेर लीं

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08सीटीके12-देर शाम जिला विकास भवन के पीछे कचरे का ढेर। अमर उजाला
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शहर हर रोज 250 मीट्रिक टन कचरा उगल रहा है। इसके बावजूद 35 साल से पक्के सफाईकर्मियों की भर्ती नहीं हुई।
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हालत यह है कि सरकार के निर्धारित मापदंडों से 50 प्रतिशत कम सफाई कर्मचारी फील्ड में हैं, जबकि सरकार के मापदंडों के मुताबिक 400 नागरिकों पर एक सफाईकर्मी होना चाहिए।
हकीकत में 821 नागरिकों पर एक सफाईकर्मी है। इसके कारण शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं। पूछने पर अधिकारी अदालत में सफाई टेंडर का केस होने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
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वित्त वर्ष 2011 में शहर की गणना हुई, जिसके हिसाब से जनसंख्या पौने चार लाख थी। 2017 में नगर निगम ने अपने स्तर पर सर्वे करवाया, जो जनसंख्या बढ़कर 5 लाख 12 हजार हो गई। इसके बाद से सर्वे नहीं हो सका है। आकलन है कि अब नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या 6 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है, क्योंकि प्रॉपर्टी आईडी 1 लाख 70 हजार से बढ़कर 2 लाख 20 हजार हो चुकी हैं। दूसरी तरफ शहर की सफाई को लेकर पूरे कर्मचारी नहीं हैं। साढ़े तीन दशक से पक्के सफाईकर्मियों की भर्ती नहीं हो सकी है।
निजी एजेंसी के हाथों में सफाई : नगर निगम में 625 सफाईकर्मी हैं, जिसमें 400 कर्मचारी कच्चे हैं। बाकी पक्के कर्मचारी हैं। कच्चे कर्मचारियों को निगम की तरफ से 16 हजार 900 रुपये मासिक वेतन दिया जाता है, जबकि पक्के कर्मचारियों को 25,000 बेसिक पे के हिसाब से वेतन मिलता है।
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निगम ने 2023 में शहर को सफाई के हिसाब से जोन एक व जोन दो में बांटा था। निगम ने 15 दिन में ही ठेका एक एजेंसी को दे दिया, जिसे दूसरी एजेंसी ने अदालत में चुनौती दे दी। अभी मामला हाईकोर्ट में उलझा हुआ है, जिसकी अप्रैल में सुनवाई होनी है। ऐसे में जोन एक व जोन दो की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है।

08सीटीके12-देर शाम जिला विकास भवन के पीछे कचरे का ढेर। अमर उजाला

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