कोरोना के नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए जल्द ही प्रदेश के डॉक्टर आत्मनिर्भर हो जाएंगे। क्योंकि पीजीआईएमएस जल्द ही रोहतक के अलावा खानपुर, करनाल व मेवात के लिए चार जीन सिक्वेंसर मंगाने की तैयारी में है। इसके लिए जल्द ही संस्थान टेंडर प्रक्रिया पूरी करने जा रहा है। इससे कोरोना के स्ट्रेन का पता लगाना आसान होगा और मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। कोरोना संक्रमणकाल में चारों मशीनें वरदान साबित होंगी।
पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव ने बताया कि जीन सिक्वेंसर 70 लाख रुपये की कीमत के हैं। इनकी चार मशीनों को संस्थान मंगाएगा और प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भेजेगा। इसके लिए पहले डिमांड भेजी गई थी और मंजूरी मिल गई है। इसका लाभ यह होगा कि कोरोना मरीजों के सैंपल की जांच कर पता लगाया जाएगा कि किस स्ट्रेन के मरीज सामने आ रहे हैं। अभी इसकी जांच के लिए सैंपलों को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की लैब में भेजा जाता है। डॉ. यादव ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल के बाद इसका प्रयोग कैंसर के मरीजों की जांच में भी किया जा सकता है। इससे मरीज के जीन में होने वाले बदलाव को जांचा जा सकता है। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस पांच प्रतिशत कोरोना संक्रमित मरीजों के सैंपल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद में स्ट्रेन की जांच के लिए भेज रहा है। प्रदेश में बढ़ रहे मरीजों में कौन सा स्ट्रेन है इसलिए अभी डॉक्टर दिल्ली पर निर्भर हैं।
क्या है जीन सिक्वेंसर और स्ट्रेन
जीन सिक्वेंसर मरीज के सैंपल में वायरस के नए प्रारूप को देखने में मदद करता है। इसमें पता लगाया जाता है कि वायरस का नया म्यूटन स्ट्रेन है या नहीं। इससे ही मरीज की बीमारी का पता लगाया जा सकता है। इससे पता लगाया जा सकता है कि वायरस कितना घातक है। ताकि समय रहते उचित कदम उठाया जा सके। इससे यह भी पता चल सकता है कि स्ट्रेन की क्षमता क्या है और वह कितना असर कारक है।