शहर में प्रतिबंधित दवाओं का काला कारोबार तेजी से पनप रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की नाक तले दिल्ली से नशीली दवाओं की लगातार सप्लाई हो रही है।
अवैध धंधा रोकने में नाकाम विभाग भी यह मान रहा है कि लड़के ही नहीं लड़कियां भी इस नशे का शिकार हो रही हैं।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एजुकेशन हब होने के चलते हम सीधे तौर पर हॉस्टलों में छापामारी नहीं कर सकते। लेकिन अब हॉस्टल संचालकों और प्रबंधकों को पत्र लिखेंगे कि वे अपने यहां ऐसी गतिविधियों पर नजर रखें।
30 से 35 रुपये का कमीशन बर्बाद कर रहा जिंदगी
शहर के कुछ केमिस्ट शॉप चोरी-छिपे प्रतिबंधित दवाइयां उपलब्ध करवा रहे हैं। वहीं कुछ तो बाकायदा अपने कस्टमर के लिए दिल्ली से इसकी लगातार सप्लाई करवा रहे हैं। दलाल महज 30 से 50 रुपये के कमीशन के चक्कर में युवाओं को बर्बाद कर रहे हैं। दिमाग सुन्न रहने के अलावा किडनी, लीवर और शरीर के अन्य हिस्सों पर सबसे ज्यादा असर होता है।
बोले अधिकारी
प्रतिबंधित दवाओं के प्रयोग में अधिकांश युवा वर्ग शामिल है। इसमें महिलाएं व लड़कियां भी शामिल हैं। एजुकेशन हब होने के चलते सीधे तौर पर हम हॉस्टलों में छापामारी नहीं कर सकते। लेकिन हम इनके संचालकों व प्रबंधकों को पत्र लिखने जा रहे हैं कि वे अपने यहां ऐसी गतिविधियों पर नजर रखें। इस कार्य में संलिप्त पाए जाने पर एनडीपी एक्ट के तहत 10 लाख रुपये का जुर्माना व दस साल तक की सजा का प्रावधान है। केमिस्ट शॉप पर हम निरंतर छापामारी करते रहते हैं।
- मंदीप मान, ड्रग कंट्रोल आफिसर, स्वास्थ्य विभाग।