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Rohtak News: पति देश की रक्षा करते हुए बलिदान, सुलेखा ने बेटी का नाम रखा सुरक्षा

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मोखरा गांव के शहीद सुरेश मलिक
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अजमेर गोयत
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महम (रोहतक)। राजपूताना राइफल्स में नायक रहे मोखरा गांव के वीर सपूत सुरेश मलिक 10 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेते हुए बलिदान हुए थे। शहादत के समय उनकी पत्नी सुलेखा सात माह की गर्भवती थीं। दो माह बाद सुलेखा ने बेटी को जन्म दिया। देश की रक्षा करते पति की दी गई शहादत को याद रखते हुए सुलेखा ने बेटी का नाम सुरक्षा रखा। बेटी सुरक्षा ने भी हरियाणा पुलिस में सिपाही बनकर मां की तपस्या को सफल साबित कर दिखाया है।
मोखरा निवासी सुलेखा बताती हैं उनके पति सुरेश मलिक की राजौरी सेक्टर में तैनाती थी। परिवार के अन्य सदस्यों की तरह वह भी युद्ध जीत कर पति के सही सलामत घर लौटने का इंतजार कर रही थीं लेकिन तिरंगे में लिपटकर उनका पार्थिव देह घर आया।
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बेटे की तरह फर्ज निभा रही सुरक्षा
सुलेखा बताती हैं उनकी शादी 1990 में हुई थी। शादी के दो वर्ष बाद बेटे सुमित का जन्म हुआ था। अफसोस सिर की नस फटने से बेटे की मौत हो गई थी। इस बीच कारगिल युद्ध में पति सुरेश मलिक बलिदान हो गए तो वह बुरी तरह टूट चुकी थी। फिर दो माह बाद सुरक्षा का जन्म हुआ तो नई जिंदगी की शुरुआत हुई। सुलेखा बताती हैं उन्होंने बेटी सुरक्षा का बेटे की तरह लालन पालन किया। सुरक्षा ने भी खुद को साबित किया। वह पुलिस में सेवा दे रही है। हमें उस पर नाज है। उसने शहीद की बेटी होने का फर्ज बेटे की तरह निभाया है।
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शहीद स्मारक के नवीनीकरण में हुआ घालमेल
सुलेखा ने आरोप लगाया है कि पंचायती राज विभाग ने बलिदानी पति के शहीद स्मारक का नवीनीकरण किया। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने स्मारक में घालमेल कर टूटे पत्थर लगा दिए हैं, जो उखड़ने लगे हैं। उन्होंने बताया कि वे इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री नायब सैनी से करेंगी।

मोखरा गांव के शहीद सुरेश मलिक

मोखरा गांव के शहीद सुरेश मलिक

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