रोहतक। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल या अन्य किसी सार्वजनिक स्थल पर आपका मोबाइल फोन बंद हो जाए तो परेशानी होना वाजिब है। ऐसी स्थिति में आप किसी से मदद मांगेगे। पर साइबर ठग इस परेशानी की घड़ी को अवसर बनाने से नहीं चूक रहे। मदद के तौर पर कोई अनजान व्यक्ति आपको चार्जर दें तो सावधान हो जाएं। यह मदद बड़ी आफत का सबब बन सकती है। मोबाइल चार्जर या यूएसबी चार्जर के जरिए आपका डाटा हैक या कॉपी कर बगैर ओटीपी व कॉल के खाते से बड़ी रकम उड़ा रहे हैं। इस ठगी का पता लगाना भी मुश्किल है।
साइबर अपराधी इस मॉड्स ऑपरेंडी (व्यक्ति, समूह आदि के काम करने की विशिष्ट शैली) में चार्जर (बिल्कुल समान मार्क/मॉडल) को पहले बदल देते हैं। इस बदले हुए चार्जर में एक माइक्रो-चिप लगा दी जाती है। इसके जरिए सारा डाटा कॉपी या हैक कर लिया जाता है। इसका पता लगाना मुश्किल होता है। हैक किए डाटा के जरिये पूरी मोबाइल बैंकिंग हैक कर खाते से पैसे आसानी से निकाल लेते हैं। इसलिए आमजन चार्जर और यूएसबी कॉर्ड पर खास नजर रखें। उन्हें अपने कार्यालय में पीछे न छोड़ें।
ये उपाय अपनाकर बच सकते हैं ठगी से : किसी और का मोबाइल इस्तेमाल न करें और न ही किसी अनजान जगह पर अपना मोबाइल चार्ज करें। हवाई अड्डे, मॉल, क्लब में लटकते चार्जर, मुफ्त चार्जिंग से कभी भी मोहित न हों। विदेश जाने पर मॉल, रेस्तरां, पर्यटक कोच में मुफ्त वाई-फाई पासवर्ड के झांसे में न आएं। किसी भी प्रकार की वित्तीय या ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर 1930 पर या डायल 112 पर कॉल करके या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https//www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करवाएं। संबंधित थाने में स्थापित साइबर हेल्पडेस्क या साइबर थाना रोहतक में शिकायत दें।
साइबर अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। ठग लोगों से ठगी के रोजाना नए हथकंडे अपना रहे हैं। इसमें मोबाइल चार्जर या यूएसबी चार्जर के जरिए आपका डाटा हैक या कॉपी कर बगैर ओटीपी लिए या कॉल किए ही खाते से बड़ी रकम उड़ाई जा रही है। इस ठगी का पता लगाना भी मुश्किल है। ऐसे में हमें खुद सतर्क रहना होगा। अनजान जगह अपना मोबाइल चार्ज करने से बचने के साथ अपना चार्जर इधर-उधर न भूलें।
- उदय सिंह मीना, पुलिस अधीक्षक